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Tuesday, 12 March 2013

यू पी सरकार ने क्यों दिए बीस बीस लाख रुपये ।


उत्तर प्रदेश सरकार ने शहीदों और कानून-व्यवस्था बिगड़ने वालो में कोई फर्क नज़र नहीं आ रहा है। डीएसपी जियाउल हक की पत्नी को जो सरकार ने मुआबजा दिया नोकरी का वादा किया वह सब सही है, पर प्रधान और उसके भाई के परिवार वालो को जो मुआबजा दिया गया है उसका अर्थ समझ में नही आ रहा है, सरकार ने जो पेस दिया वह किस का रूपया था जनता का उसको इस तरह किसी को भी दे देना क्या उचित है प्रधान और उसका भाई दुकानों पर कब्जे को लेकर चली आरही रंजिश के शिकार हुए थे न हीं किसी युद्ध के मैदान में । सोलाह दिसम्बर की घटना के बाद ये कहा की जिस के साथ बलात्कार जेसी घटना होती है उत्तर प्रदेश सरकार उसको नोकरी देगी , अब सरकार को ये भी घोषणा करनी चाहिए की एक दुसरे को मरो मरने वाले को परिवार को बीस बीस लाख रुपये मिलेगे और ज्यदा बेहतर ये होगा की मारें वाले के परिवार को कुछ न सही पञ्च लाख तो मिलने चाहिए क्यों की उस के परिवार का व्यक्ति भी तो जेल जाये ग तो उस के परिवार का लालन पालन कोण करेगा । नन्हे प्रधान और सुरेन्द्र के परिवार वालो को क्या इस लिए ये रूपया दिया गया की वह समाजवादी पार्टी के कार्यकर्त्ता थे या रजा भईया के खास थे । जिस प्रकार सरकार दिखावे के लिए राज्य सरकार जनता के पेसे को बर्वाद कर रही है इस पर सरकार से किसी  मिडिया वाले ने नहीं पूछा की क्यों दिया गया प्रधान के परिवार बालो को ये पैसा । सरकार अपने वोट बैंक को बदने के लिए सरकार खजाने को दिखावे के लिए खली करती जा रही है चाहे वह लेपटोप बाँटना हो , बेरोजगारी भत्ता बतना हो , कन्याओ को तीस हज़ार के चेक बटने हो जहा जहा यह कार्यकर्म का आयोजन किया गया उस के लिए पेस कहा से आया वह भी जनता का था केवल और केवल दिखावा करने के लिए सरकार ने करोडो रूपए पानी में वह दिए और अगर विकास की बात करे तो सरकार कहती है की केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश को पैसा नहीं देती है ।     



Tuesday, 5 March 2013

उत्तर भारतीयों से सवाल

एक बार फिर से उत्तर भारतीयों पर राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने सतारा में सैनिक स्कूल में दाखिले के लिए आए बच्चों और उनके पैरंट्स के साथ मारपीट की है।
इस शर्मशार हरकत के बाद में उन उत्तर भारतीयों से ये सवाल पूछता हु जो लोग उत्तर भारत में शिव सेना और एमएनएस पार्टी का झंडा ऊचा करते है।
क्या उन्हें ये हरकत देखकर शर्म नहीं आती की उनके भाइयो और बच्चो के साथ ये लोग के सुलूग करते है महाराष्ट्र में क्या बस राजनीति की रोटिया सीखनी है इन लोगो को
ये देश हम सब का है भारत देश में रहने वाला हर कोई सब से पहले भारतीय है बाद में किसी राज्य का है तो राज ठाकरे जेसे लोग ये देश को क्यों तोड़ने पर लगे है
दूसरी बात ये की क्या डर है कानून को जो इन पर शिकंजा नहीं कसती है और क्यों उत्तर भारत के लोग इन का साथ देते है क्या इन को ये लगता है की हम इन के साथ है तो ये लोग हमें कुछ नहीं कहेगे इन सब को तब पता चलेगा जब किसी दिन ये लोग महाराष्ट्र में पिटते नज़र आयेगे । इन सब से क्या सिद्ध करना चाहते है ये सब 
 

Saturday, 19 January 2013

क्या राहुल गाँधी पार लगा पायेगे कांग्रेस की नैया ?

2014 लोकसभा चुनाव इन चुनावो को लेकर सभी राजनीती पार्टियां आज कल मंथन में लगी है , भाजपा में मंथन होरहा है की उसके पास मुद्दे तो बहुत है चुनाव में प्रचार के लिए पर  वह किस के नाम का सहारा लेकर चुनाव लड़े नरेन्द्र मोदी ,सुषमा स्वराज ,शिवराज सिंह चौहान ,या अरुण जेटली पता नहीं लोकसभा चुनाव आते आते भाजपा तय कर पाती है या नहीं कोन होगा प्रधानमंत्री का प्रवल दावेदार । ये तो थी भाजपा की बात पर कांग्रेस का क्या जो दो दिन से जयपुर में बैठ कर चिंतन कर रही है आने वाले चुनाव किन मुद्दों को लेकर लड़ा जाये क्यों की न तो ये महगाई कम कर पाई , भ्रष्ट्राचार से देश उबक चूका है , देश के सामने इस वक्त कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां है इन सब विषयों को लेकर कांग्रेस में मंथन चल रहा है वही सब से बड़ी बात ये की कांग्रेस के युवराज के कंधो पर पार्टी अतरिक्त भार पड़ने वाला है क्यों की पार्टी के अन्दर के लोग मानते है की ये ही कोई चमत्कार कर सकते है और केवल और केवल यही वह शख्स है जो कुछ नया कर सकता है पार्टी के अन्दर और इस शिवर में पार्टी अध्यक्ष बनाने का ऐलान भी हो सकता है। इस नन्ही से जान पर पूरी कांग्रेस का भार पड़ने वाला है कहते है की करे कोई और भरे कोई पिछले नो सालो में काग्रेस ने कोई ऐसा कम नहीं किया जिस को लेकर पार्टी के नेता जनता के सामने आये इस लिए सरकार और कांग्रेस के पास राहुल गाँधी के आलावा कोई विकल्प नहीं है क्या सरकार राहुल गाँधी की अगुवाई में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां को बचे एक साल में किसी चमत्कार से कम या ख़त्म कर पायेगे या नहीं । 

Saturday, 29 December 2012

माँ में जीना चाहती हु : दामनी


दिल्ली गेंग रेप पीड़ित दामनी भले है हमेशा के लिए सो गयी हो पर उस ने आज पुरे देश को जगा दिया है,जीवन और मोत के लिए लड़ रही दामनी मोत से आखरी वक़्त तक लड़ती रही पर मोत के आगे उसकी एक न चली आखरी समय तक अपनी माँ से यही कहती रही की माँ में जीना चाहती हु । दामनी की आखें भले ही हमेश के लिए बंद हो गई पर देश के लोगो को सिखा गयी की किस तरह से अपने हक़ के लिए लड़ा जाता है ,ऐसा  आज़ादी के 65 साल बाद एस पहली बार हुआ है कि इस देश की जनता किसी को इंसाफ दिलाने के लिये,पूरा देश एक साथ खड़ा हुआ हो ,संसद से लेकर सड़क तक बस यही माग की इन बलात्कारियों को फासी की सजा हो और महिलाओ की सुरक्षा व्यवस्था के लिए नया कानून बनाया जाये जिस से आने वाले वक़्त में दामनी की तरह कोई और लड़की बलात्कार की शिकार न बने और इस हेवानियत को अंजाम देने से पहले दस बार अपराधी सोचे की उसका हश्र क्या होगा आज देश के हर व्यक्ति के अन्दर गुस्सा है चाहे वह बूढ़ा ,बच्चा महिला या पुरुष हो हर कोई अपनी सुरक्षा की मांग कर रहा ही महिला अपनी तो पुरुष अपनी माँ, बेटियों और बहनों की कही उस के परिवार और देश में दामनी जेसा दर्द किसी और को सहना पड़े । लेकिन हर समस्या का हल कानून ही नहीं हम को भी आगे आना होगा , अगर दस पुरषों में एक महिला अकेली है और भले ही उस को एक से ख़तरा हो तो बाकी नौ लोगो को उस की रक्षा करनी होगी हमे लड़ना होगा हर उस महिला के लिए जो किसी की माँ-बेटी या बहन है,हमे बताना होगा समाज को की बेटिया ही किसी के घर की शोभा बनती है ये बेटिया ही हमारी माँ -बहिन और बीबी बनती है ये ही है जो सच में हमारे बंश को आगे ले जाती है हमे अपनी  कोख़ से जन्म देती है लेकिनक्या हम ये सब कर पाएगे या दामनी की यादो के साथ धीरे धीरे सब खत्म हो जायेगा नहीं अब ऐसा  नहीं होगा क्यों अब भारत जाग रहा है अब लोग जाग रहे है जमाना जाग रहा है और दामनी का ये बलिदान खली नहीं जायेगा ।         


Sunday, 25 November 2012

कसाब की तुलना शहीद भगत सिंह से क्यों ?


बाबा रामदेव कसाब की फासी पर ऊँगली उठानी शुरू कर दी है , और केंद्र सरकार के ऊपर इलज़ाम लगाया है की उस ने कसाब को फासी देकर हीरो बना दिया है । कसाब को फासी देकर सरकार ने आतंकियों के सामने घुटने टेक दिए है । 
बाबा रामदेव ने अब तक सरकार को काले धन को लेकर घेरा है और इस बात से हर हिन्दुस्तानी का पता चला की हमारा कितना धन विदेशो में जमा है अगर वह वापस आजाये तो भारत की अर्थ व्यवस्था और सही हो जायगी । लेकिन आज के इस बयां से बाबा रामदेव क्या कहना चाहते है । भगत सिंह की फासी और कसब को दी गयी फासी से तुलना कर दी । कसाब एक आतंकवादी था जिस के हट मासूमो के खून से रंगे थे और भगत सिंह एक सच्चा देश भक्त जिस ने अपने प्राणों को इस देश की आजादी के लिए नोछावर कर दिए । कस्साब की फासी तय तारीख पर हुई ,हो सकता था सरकार अगर इस को सब के सामने बताती की फासी कब कहा और किस समय दे जायेगी तो हो सकता है वह हीरो बन जाता क्यों की लोग फासी के समय जेल के आस पस्स जरुर जाती मीडिया भी इस से पीछे नहीं रहती वह भी वहा पहुच जाती और वह बन जाता रातो रत हीरो जिस  फासी हुई उस  के   भी न्यूज़ चेनल पर कसाब को लेकर ज्यदा न्यूज़ नहीं देखने को मिली पर हम तुम इस मामले को तूल देकर जरुर कसाब को हीरो बना रहे है । सरदार भगत सिंह को अंग्रेजो ने धोके से मारा उस को एक दिन पहले फासी दे दी गयी उस की लाश को भी उस के परिवार वालो के हवाले नहीं किया और जल्दी जल्दी में उसका शव को नदी में बहा दिया ।
सरकार ने कसाब को तेय समय पर फासी दी सव को पाकिस्तान में लेने की भी बात कही पर उन्होंने शव लेने से मन कर दिया । कोई व्यक्ति देश का हो बहार का हो भले ही वह आतंकवादी है क्या हमारा ज़मीर हमारा देश या संस्क्रति इस बाद के लिए कहती है की किसी के शव को उसके धर्म के मुताबिक उसका अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिये । कसाब को फासी देकर सरकार ने अपने घुटने नहीं टेके है बल्कि सबक दिया है उन आतंकियों को की इस देश आतंक वाद फेलोगे तो इसी तरह फाशी पर लटका दिए जाओगे । में तो घोर निंदा कर ता हु एक देश भगत की फासी और एक आतंकवादी की फासी को एक समान बताने वाले बाबा राम देव की । 


    

Saturday, 24 November 2012

उत्तर प्रदेश के किसानो पर पड़ेगी बढ़ते ब्याज की मार।


उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बने हुए आठ महीने का समय हो गया है चुनाव के समय अपने घोषणा पत्र में जो किसानो के लिए 50000 हज़ार कर्ज माफ़ी की घोषणा की गयी थी ,मार्च के बाद से ही किसानो ने अपने कर्ज की किश्तों का भुकतान नहीं किया क्यों की सब को यही उम्मीद थी की 50000 हज़ार रूपए तक का क़र्ज़ सभी किसानो का माफ़ हो जायेगा ,लेकिन क़र्ज़ माफ़ी के चक्कर में किसानो को बडते ब्याज की मार झेलनी पड़ेगी । 
अगर किसान मार्च में अपना क़र्ज़ चुकाते तो :- 3% का ब्याज 
अब भुगतान करना :- 12.70 % ब्याज दर से जिस में 2% का पेनल्टी शुल्क शामिल है 
और अगर इस कर्ज जी वसूली तहसील दुआरा या अमीन करते है तो 10% कनेक्शन शुल्क और देना पड़ेगा।
यानि की अगर किसान ने अपना कर्ज नहीं दिया तो उसको मूलधन पर कुल 22.70% का ब्याज देना पड़ेगा   
और कर्ज भी उसी व्यक्ति का माफ़ होगा जिस व्यक्ति ने अपने मूलधन का 10% जमा किया है या उस किसान की भूमि बेंक के पास राखी हो उसी किसान का कर्ज माफ़ होगा और किसी का नहीं । प्रदेश सरकार ने भ्रमित कर के किसानो का वोट बेंक तो हासिल कर लिया मगर अब छोड़ दिया ब्याज के  मरने के लिए ।
किसान इसी आस में रहे की हर किसी किसान का कर्ज माफ़ होगा मुलायम सिंह के जन्म दिन पर जो सोगात किसानो को दी गयी उस से कुछ ही किसानो के चेहरे खिले है बाकि किसानो को मायूसी हाथ लगी है और सर पर चढ़ गया है ढेर सारा ब्याज 50000 हजार का कर्ज चुकाने में तो किसानो को अपना खून पसीना एक करना पड़ गया , लेकिन जो कर्ज पर आज ब्याज चडा है उस को चुकाने में तो किसानो को अपनी जान गवानी पड़ जायेगी । देश प्रदेश में किसानो दुआर जो आत्महत्या की जा रही है क्या वह पहले से कम है जो सरकार उन्हें कर्ज माफ़ी का लालच देकर किसानो के सर पर बड़ते हुए ब्याज का भार डाल कर और कर्ज के दल दल में धकेल दिया


Wednesday, 21 November 2012

क्या होगा संसद शीतकालीन सत्र का ?

संसद शीतकालीन सत्र आज से शुरू भारी हंगामे की आशंका 
आज से शुरू होने वाला संसद का शीतकालीन सत्र क्या चल पायेगा ?
ऐसे न जाने कितने सवाल इस देश के हर व्यक्ति के मन में चल रहे होगे कही पिछली बार की तरह
हंगामे की भेट चढ़ जायेगा इस बार भी ये सत्र संसद वह जगह है जहा देश के हर क्षेत्र से हमरे संसद कुछ सवाल लेकर आयेगे और सरकार से उसका जवाब मागेगे पर क्या ये हो पायेगा या हम होगे शर्मशार क्यों की यहाँ हो सकता है हंगामा बन सकता है यहाँ अखाड़ा ।क्यों की लोगो की नहीं है मंशा पहले इन को चाहिए अपने सवालो के जवाब :-
एफ डी आई के मुद्दे को लेकर टकराव साफ दिखाई दे रहा है ।
सरकार के खिलाफ आविश्वास प्रस्ताव ला सकती है तर्मुल कांग्रेस ।
बीजेपी का कहना है की एफ .डी . आई मुद्दे पर वोटिंग होनी चाहिए ।
बसपा प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सवाल उठयेगी ।
आविश्वास प्रस्ताव से रहेगी दूर ।
सपा ने कोई भी पते नहीं खोले है
184 के तेहत चर्चा हो मत विभाजन वोटिंग की मांग ।
वोटिंग के पक्ष में नहीं है सरकार ।
25 विधयेक पास होने है 16 दिन में क्या एसा हो पायेगा ?
क्या लोकपाल बिल होगा पास लोकायुक्त होगा और मजबूत ।
विपक्ष सत्र के दोरान दुसरे मुद्दों को लेकर सरकार को क्यों नहीं घेरती है।
यही मोका होता है जब सरकार से सरे मुद्दों पर सरकार से सवाल किये जाये और जवाब
मांगा जाये एक ही मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना सरकार को गिरना क्या यही है । विपक्ष का काम
महगाई आज का सब से बड़ा मुद्दा है, विकास ,देश में हो रहे घोटाले भ्रष्टाचार भी बहुत बड़ा मुद्दा क्या कर रही है। इन सब को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है ? इन सब से परे हट ती हुई दिखाई दे रही है विपक्ष का कहना है की महगाई भ्रष्टाचार जेसे मुड़े पर पहले भी कई बार बहस हो चुकी है एफ डी आई नया मुद्दा है ।
क्या ये सही है आप लोगो की राय चाहिए ?