Saturday, 29 December 2012
Sunday, 25 November 2012
कसाब की तुलना शहीद भगत सिंह से क्यों ?
बाबा रामदेव कसाब की फासी पर ऊँगली उठानी शुरू कर दी है , और केंद्र सरकार के ऊपर इलज़ाम लगाया है की उस ने कसाब को फासी देकर हीरो बना दिया है । कसाब को फासी देकर सरकार ने आतंकियों के सामने घुटने टेक दिए है ।
बाबा रामदेव ने अब तक सरकार को काले धन को लेकर घेरा है और इस बात से हर हिन्दुस्तानी का पता चला की हमारा कितना धन विदेशो में जमा है अगर वह वापस आजाये तो भारत की अर्थ व्यवस्था और सही हो जायगी । लेकिन आज के इस बयां से बाबा रामदेव क्या कहना चाहते है । भगत सिंह की फासी और कसब को दी गयी फासी से तुलना कर दी । कसाब एक आतंकवादी था जिस के हट मासूमो के खून से रंगे थे और भगत सिंह एक सच्चा देश भक्त जिस ने अपने प्राणों को इस देश की आजादी के लिए नोछावर कर दिए । कस्साब की फासी तय तारीख पर हुई ,हो सकता था सरकार अगर इस को सब के सामने बताती की फासी कब कहा और किस समय दे जायेगी तो हो सकता है वह हीरो बन जाता क्यों की लोग फासी के समय जेल के आस पस्स जरुर जाती मीडिया भी इस से पीछे नहीं रहती वह भी वहा पहुच जाती और वह बन जाता रातो रत हीरो जिस फासी हुई उस के भी न्यूज़ चेनल पर कसाब को लेकर ज्यदा न्यूज़ नहीं देखने को मिली पर हम तुम इस मामले को तूल देकर जरुर कसाब को हीरो बना रहे है । सरदार भगत सिंह को अंग्रेजो ने धोके से मारा उस को एक दिन पहले फासी दे दी गयी उस की लाश को भी उस के परिवार वालो के हवाले नहीं किया और जल्दी जल्दी में उसका शव को नदी में बहा दिया ।
सरकार ने कसाब को तेय समय पर फासी दी सव को पाकिस्तान में लेने की भी बात कही पर उन्होंने शव लेने से मन कर दिया । कोई व्यक्ति देश का हो बहार का हो भले ही वह आतंकवादी है क्या हमारा ज़मीर हमारा देश या संस्क्रति इस बाद के लिए कहती है की किसी के शव को उसके धर्म के मुताबिक उसका अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिये । कसाब को फासी देकर सरकार ने अपने घुटने नहीं टेके है बल्कि सबक दिया है उन आतंकियों को की इस देश आतंक वाद फेलोगे तो इसी तरह फाशी पर लटका दिए जाओगे । में तो घोर निंदा कर ता हु एक देश भगत की फासी और एक आतंकवादी की फासी को एक समान बताने वाले बाबा राम देव की ।
Saturday, 24 November 2012
उत्तर प्रदेश के किसानो पर पड़ेगी बढ़ते ब्याज की मार।
उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बने हुए आठ महीने का समय हो गया है चुनाव के समय अपने घोषणा पत्र में जो किसानो के लिए 50000 हज़ार कर्ज माफ़ी की घोषणा की गयी थी ,मार्च के बाद से ही किसानो ने अपने कर्ज की किश्तों का भुकतान नहीं किया क्यों की सब को यही उम्मीद थी की 50000 हज़ार रूपए तक का क़र्ज़ सभी किसानो का माफ़ हो जायेगा ,लेकिन क़र्ज़ माफ़ी के चक्कर में किसानो को बडते ब्याज की मार झेलनी पड़ेगी ।
अगर किसान मार्च में अपना क़र्ज़ चुकाते तो :- 3% का ब्याज
अब भुगतान करना :- 12.70 % ब्याज दर से जिस में 2% का पेनल्टी शुल्क शामिल है
और अगर इस कर्ज जी वसूली तहसील दुआरा या अमीन करते है तो 10% कनेक्शन शुल्क और देना पड़ेगा।
यानि की अगर किसान ने अपना कर्ज नहीं दिया तो उसको मूलधन पर कुल 22.70% का ब्याज देना पड़ेगा
और कर्ज भी उसी व्यक्ति का माफ़ होगा जिस व्यक्ति ने अपने मूलधन का 10% जमा किया है या उस किसान की भूमि बेंक के पास राखी हो उसी किसान का कर्ज माफ़ होगा और किसी का नहीं । प्रदेश सरकार ने भ्रमित कर के किसानो का वोट बेंक तो हासिल कर लिया मगर अब छोड़ दिया ब्याज के मरने के लिए ।
किसान इसी आस में रहे की हर किसी किसान का कर्ज माफ़ होगा मुलायम सिंह के जन्म दिन पर जो सोगात किसानो को दी गयी उस से कुछ ही किसानो के चेहरे खिले है बाकि किसानो को मायूसी हाथ लगी है और सर पर चढ़ गया है ढेर सारा ब्याज 50000 हजार का कर्ज चुकाने में तो किसानो को अपना खून पसीना एक करना पड़ गया , लेकिन जो कर्ज पर आज ब्याज चडा है उस को चुकाने में तो किसानो को अपनी जान गवानी पड़ जायेगी । देश प्रदेश में किसानो दुआर जो आत्महत्या की जा रही है क्या वह पहले से कम है जो सरकार उन्हें कर्ज माफ़ी का लालच देकर किसानो के सर पर बड़ते हुए ब्याज का भार डाल कर और कर्ज के दल दल में धकेल दिया
Wednesday, 21 November 2012
क्या होगा संसद शीतकालीन सत्र का ?
संसद शीतकालीन सत्र आज से शुरू भारी हंगामे की आशंका
आज से शुरू होने वाला संसद का शीतकालीन सत्र क्या चल पायेगा ?
ऐसे न जाने कितने सवाल इस देश के हर व्यक्ति के मन में चल रहे होगे कही पिछली बार की तरह
हंगामे की भेट चढ़ जायेगा इस बार भी ये सत्र संसद वह जगह है जहा देश के हर क्षेत्र से हमरे संसद कुछ सवाल लेकर आयेगे और सरकार से उसका जवाब मागेगे पर क्या ये हो पायेगा या हम होगे शर्मशार क्यों की यहाँ हो सकता है हंगामा बन सकता है यहाँ अखाड़ा ।क्यों की लोगो की नहीं है मंशा पहले इन को चाहिए अपने सवालो के जवाब :-
एफ डी आई के मुद्दे को लेकर टकराव साफ दिखाई दे रहा है ।
सरकार के खिलाफ आविश्वास प्रस्ताव ला सकती है तर्मुल कांग्रेस ।
बीजेपी का कहना है की एफ .डी . आई मुद्दे पर वोटिंग होनी चाहिए ।
बसपा प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सवाल उठयेगी ।
आविश्वास प्रस्ताव से रहेगी दूर ।
सपा ने कोई भी पते नहीं खोले है
184 के तेहत चर्चा हो मत विभाजन वोटिंग की मांग ।
वोटिंग के पक्ष में नहीं है सरकार ।
25 विधयेक पास होने है 16 दिन में क्या एसा हो पायेगा ?
क्या लोकपाल बिल होगा पास लोकायुक्त होगा और मजबूत ।
विपक्ष सत्र के दोरान दुसरे मुद्दों को लेकर सरकार को क्यों नहीं घेरती है।
यही मोका होता है जब सरकार से सरे मुद्दों पर सरकार से सवाल किये जाये और जवाब
मांगा जाये एक ही मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना सरकार को गिरना क्या यही है । विपक्ष का काम
महगाई आज का सब से बड़ा मुद्दा है, विकास ,देश में हो रहे घोटाले भ्रष्टाचार भी बहुत बड़ा मुद्दा क्या कर रही है। इन सब को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है ? इन सब से परे हट ती हुई दिखाई दे रही है विपक्ष का कहना है की महगाई भ्रष्टाचार जेसे मुड़े पर पहले भी कई बार बहस हो चुकी है एफ डी आई नया मुद्दा है ।
क्या ये सही है आप लोगो की राय चाहिए ?
आज से शुरू होने वाला संसद का शीतकालीन सत्र क्या चल पायेगा ?
ऐसे न जाने कितने सवाल इस देश के हर व्यक्ति के मन में चल रहे होगे कही पिछली बार की तरह
हंगामे की भेट चढ़ जायेगा इस बार भी ये सत्र संसद वह जगह है जहा देश के हर क्षेत्र से हमरे संसद कुछ सवाल लेकर आयेगे और सरकार से उसका जवाब मागेगे पर क्या ये हो पायेगा या हम होगे शर्मशार क्यों की यहाँ हो सकता है हंगामा बन सकता है यहाँ अखाड़ा ।क्यों की लोगो की नहीं है मंशा पहले इन को चाहिए अपने सवालो के जवाब :-
एफ डी आई के मुद्दे को लेकर टकराव साफ दिखाई दे रहा है ।
सरकार के खिलाफ आविश्वास प्रस्ताव ला सकती है तर्मुल कांग्रेस ।
बीजेपी का कहना है की एफ .डी . आई मुद्दे पर वोटिंग होनी चाहिए ।
बसपा प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सवाल उठयेगी ।
आविश्वास प्रस्ताव से रहेगी दूर ।
सपा ने कोई भी पते नहीं खोले है
184 के तेहत चर्चा हो मत विभाजन वोटिंग की मांग ।
वोटिंग के पक्ष में नहीं है सरकार ।
25 विधयेक पास होने है 16 दिन में क्या एसा हो पायेगा ?
क्या लोकपाल बिल होगा पास लोकायुक्त होगा और मजबूत ।
विपक्ष सत्र के दोरान दुसरे मुद्दों को लेकर सरकार को क्यों नहीं घेरती है।
यही मोका होता है जब सरकार से सरे मुद्दों पर सरकार से सवाल किये जाये और जवाब
मांगा जाये एक ही मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना सरकार को गिरना क्या यही है । विपक्ष का काम
महगाई आज का सब से बड़ा मुद्दा है, विकास ,देश में हो रहे घोटाले भ्रष्टाचार भी बहुत बड़ा मुद्दा क्या कर रही है। इन सब को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है ? इन सब से परे हट ती हुई दिखाई दे रही है विपक्ष का कहना है की महगाई भ्रष्टाचार जेसे मुड़े पर पहले भी कई बार बहस हो चुकी है एफ डी आई नया मुद्दा है ।
क्या ये सही है आप लोगो की राय चाहिए ?
Tuesday, 20 November 2012
कसाब को फासी अफजल गुरु को कब
आज सुबह का दिन मुंबई हमले में मरे गये निर्दोष लोगो को श्रधांजलि दिन के रूप में जाना जायेगा क्यों की आज सुबह 7.30 बजे मुंबई हमले का दोषी अजमल कसाब को फासी दे दी गयी। 2008 में मुंबई हमले का दोषी कसब 26 नवम्बर को गिरफ्तार किया गया था। कसाब ने फासी माफ़ी के लिये राष्ट्रपति के यहाँ अपनी याचिका भेजी थी उस याचिका के ख़ारिज होने के बाद से ही ये अनुमान लगाया जा रहा था की अब कसब को फासी निश्चित है और आखिर आज 21/11/2012 को कसब को फासी दे दी गयी। जिस तरह से सरकार ने अजमल कसब की फासी में देरी नहीं लगायी तो संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के मामले में देरी क्यों कर रही है अफजल गुरु 13/12/2001 को संसद हमले का मुख्य आरोपी है ये हमला हमारे लोकतंत्र पर हमला था कोर्ट ने फासी की सजा सुनाये जाने के बाद दया याचिका राष्ट्रपति के यहाँ विचाराधीन है । जीतनी जल्दी कसाब की फासी में दिखाई उतनी ही देरी अफजल गुरु की फासी में की जा रही है । अफजल गुरु की फासी की सजा को उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा कांग्रेस सरकार मोहम्मद अफजल गुरु की फासी के मामले में कुछ भी कहने में कतरा रही है और मामले को राष्ट्रपति के पास दया याचिका होने का हवाला देती है।
Sunday, 18 November 2012
मुंबई का शेर कोन बाला साहब ठाकरे
बालीबुड की एक फिल्म 'सत्य' जिस में मनोज बाजपेयी का एक डायलाग था की मुंबई का किंग कोन 'भीकू महत्रे' लेकिन असल में मुंबई का किंग भीकू महत्रे शिव सेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे थे । शिव सेना पार्टी का जो झंडा है उस पर भी शेर का चिन्ह है या उस झंडे पर बाला साहब ठाकरे का फोटो इसी लिए बाला साहब ठाकरे को महाराष्ट्र का शेर के नाम से जाना जाता था और आगे भी जाना जायेगा इस इस शेर की जगह कोई भी नहीं ले सकता । बाला साहब ठाकरे को आज अंतिम विदाई देने के लिए सारा मुंबई शहर का जन सेलाव शिवाजी पार्क की तरफ चल दिया है । कहते है जब शेर बुढा हो जाता है तो वह अपनी मदान में चुप जाता है लेकिन बाला साहब ठाकरे इसे शेर थे जो आखरी समय में भी अपने विरोधियो पर गरजे उन्होंने आखरी समय में कहा था की मेरा शरीर साथ नहीं दे रहा है मगर मेरा मन आज भी आप के लिए कुछ करने का मन करता है उन्होंने जाते जाते अपने सेनिको से कहा की अब तक मेने आप को और शिव सेना को चलाया अब आप लोग चलाये । बाल ठाकरे की सब से बड़ी खासियत ये थी की जो उन्होंने जो एक बार कह दिया वह कर के दिखाया और उस बात से कभी भी पीछे नहीं हटे । बाला साहब ठाकरे की पहचान किसी राजनीती व्यक्ति की नहीं रही उन्होंने हमेशा लोगो के बीच में रहकर लोगो को जोड़ने का कम करते थे उन्होंने हमेश लोगो को हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया । बाला साहब एक ऐसे शख्स थे जो आम आदमी थे अगर ये एक आम आदमी हमेश शेर की तरह जिया जिस की एक आवाज़ पर पूरा महाराष्ट्र सडको पर निकल आया करता था । जब पहली बार बाला साहब ठाकरे को गिरफ्तार किया गया तो सारा मुंबई सडको पर था । लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं रहे आज उनके पार्थिव शारीर को अंतिम विदाई दी जा रही है ।
Saturday, 17 November 2012
पोंटि चड्ढा की मोत का कारण उस का सम्राज
मुरादाबाद के निवासी और उत्तर प्रदेश के सब से बड़े शराब माफिया पोंटि चड्ढा की हत्या उन्ही के भाई हरदीप चड्ढा दुरा कर दी गयी इस ख़बर से पुरे चड्ढा गुरुप और मुरादाबाद शहर में शोक की लहर है । मुरादाबाद के लाजपत नगर के छोटे से घर में रहने वाले पोंटि चड्ढा आज पुरे 50 हज़ार करोड़ की सम्पति के मालिक थे इसी सम्पति को लेकर इन दोनों भाइयो में झगडा चल रहा था और दोनों की मोत का कारण भी यही यही संम्पति बनी । 6 हज़ार का शराब का कारोबार हजारो करोड़ो की प्रोपर्टी का कारोबार था पोंटि चड्ढा का 4000 शराब की दुकाने थी , शुगर मिले पेपर मिले शोपिंग मॉल ,फिल्म बनाने तथा फिल्म बेचने का कारोबार था , राजनीती में भी अपनी अच्छी पकड़ थाई पोंटि की 2003 से मायावती की सरकार के बाद पोंटि का कारोबार दिन दुगनी रात चोग्नी तरकी करी । पोंटि की मोत के बात सब से बड़ा सवाल यही खड़ा होता है की इस विशाल प्रोपर्टी का मालिक कोन होगा उत्तर प्रदेश , पंजाब, हिमाचल प्रदेश में अपना लोहा मनवा चूका था पोंटि चड्ढा । लिकिन पोंटि च्द्दाहा ने कभी नहीं सोचा होगा की इतनी बड़ी प्रोपर्टी का मालिक या व्यवसाय का मालिक होने के बाद भी इस तरहा से उस की मोत होगी । पोंटि चड्डा की मोत के तुरंत सभी मॉल को बंद कर दिया गया सभी सनीमा हेलो को भी बाद कर दिया गया सभी लोगो के पेसे को बापस करदिये गए । कुछ भी कहो पोंटि का अपना सम्राज था और उसी पर वह राज करता था और इसी वजह से परिवार में उस सम्राज को लेकर आपस में विवाद उत्पन होना शुरू होगया था और यही पोंटि की मोत का कारण बन गयी ।
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