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Friday, 9 March 2012

सत्ता की चावी युवा अखिलेश यादव के हाथ में

उत्तर प्रदेश में समाजवादी की सरकार बने जा रही है आज बैठक में अखिलेश यादव को मुख्य मंत्री बनाने पर लगभग मोहर लग गयी है | आज समाज वादी पार्टी उत्तर प्रदेश में एक बदलाब करने जा रही है वह है उत्तर प्रदेश की सत्ता की चावी युवा के हाथ में देने जा रही है अब देखना ये है की ये युवा कितना बदलाव करते है हर कोई चाहता था की अब सत्ता की चावी युवाओ के हाथ में आनी चाहिए सो कुछ ही पलो के बाद उत्तर प्रदेश की बागडोर युवाओ के हाथ में आने वाली है देखना है की ये युवा कितना बदलाब करते है और क्या नई क्रांति लाते है सत्ता में आने के बाद |
अखिलेश यादव एक पड़े लिखे युवा है वह आज के माहोल से वाकिफ है क्या जरुरत है युवाओ की जनता की सब को भली बहती समझते है पर चुनोती बड़ी मुश्किल है कितना खरा उतारते है इस चुनोती पर अब ये देखना है 
और सही भी है जहा सरकारी पोस्टो पर बैठा कोई भी वियक्ति 60-62 सेल की उम्र में रिटायर हो जाता है तो ये लोग जब वह एक ऑफिस का काम नहीं सम्भाल सकता और वह रिटायर हो जाता है तो 60-62 साल का आदमी देश का क्या चला पाएगा इसी लिए देश हो या प्रदेश अब सब जगह युवाओ की भागे- दरी होनी चाहिए | अखिलेश यादव को मुख्या मंत्री बनते है तो सब से पहले जनता दरबार शुरू करना होगा जनता को जितना अपने करीब लायेगे प्रदेश की समस्या को हल कर पाएगे जाती- धर्म से हट कर के सत्ता चली पड़ेगी क्यों की इस बार हर जाती और धर्म को वोट उन को मिला है और अब के दिखाना होगा जो उन पर इलज़ाम हर बार लगाया जाता था वह गलत था  इन को देखते हुए राजनीती करने पड़ेगी तभी आगे और आगे बड़ पाएगे नहीं तो अगले पाच साल बाद फिर चुनाव है    

Tuesday, 6 March 2012

ढका हाथी लाख का खुला हाथी खाक का


उत्तर विधान सभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी अब तक सब को धुल में उड़ाती नज़र आती थी, पर आंधी ज्यादा जोर से आई और खुँद ही उड़ गयी 
सरकार या बहुजन समाज पार्टी को जनता ने नहीं नाकारा और ना ही उन का वोट बैंक इतना कम हुआ है आज भी 28% वोट बैंक उन के पास है 
उत्तर प्रदेश की राजनीती मायावती चला रही थी पर सरकार केवल चार नोकर शाह चला रहे थे जिन्होंने मायावती को केवल दर्शक के रूप में एक कमरे में बंद कर दिया हो और खिड़की पे बेठा दिया हो की यहाँ से बेठ कर खिड़की से बहार देखती रहो की सरकार की नईया केसे दुबई जाती है मायावती का अपने पार्टी कार्यकर्ताओ  से ना मिलना जनता से ना मिलना पार्टी के कार्यकर्ताओ से ज्यदा नोकर शाह पर भरोसा करना यही बात सही में बहुजन समाज पार्टी को लेडूबी और इन सब ने मिलकर खूब भ्रष्टाचार किया ये एक बड़ा मुदा रहा इस चुनाव में विकास को हम नहीं नकार सकते विकास हुआ है आज उत्तर प्रदेश की विकास दर 8.4 है जो कभी नहीं रही | अपने से जादा दुसरो पर भरोसा नहीं करना चाहिए था 2007 में बड़ी उमीद के साथ जनता ने सत्ता की चावी दे थी पर इस को मायावती सम्भाल नहीं पाई और नतीजा आज सब के सामने है |
अब जब सत्ता चली गयी है तो अब मायावती ये ना करे जो हर वार करती है की दिल्ली जा कर बैठ जाती है इस हर पर मंथन किया जाना चाहिए की कहा कमी रह गयी सत्ता चलने में| और ये कहावत उलटी हो गयी की खुला हाथी लाख का ढका हाथी सवा लाख का जेसे ही हाथी को खोला वह खाक का हो गया|      

Monday, 5 March 2012

ओ राजनीती गठजोड़ ,वादा न तोड़


नेताओ ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया की जनता कितनी भोली है चुनावी सभाओ में मीडिया में बस एक ही बात कही हम किसी से भी गठबंधन नहीं करेगे , बहुमत नहीं आया तो हम विपक्ष में बैठेगे ये बात बहुजन समाज पार्टी के अलाबा सभी राजनीती पार्टियों ने कही थी अभी तो नतीजे नहीं आये है और पहला वादा खत्म सब लालची है बस सत्ता चाहिए क्यों की जनता तो भोली है वह बातो में आजाती है और फिर पुरे पाच साल रोती है   
उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे चाहे जो हों, राज्‍य की चार अहम राजनीतिक पार्टियों के लिए इनके क्‍या मायने होंगे, 
समाज वादी पार्टी के लिए बुरी स्थिति तब बनेगी, जब उसकी सीटें 140 के करीब रहती हैं। ऐसे में उसे सत्ता पर काबिज होने के लिए कांग्रेस पर निर्भर होना पड़ेगा। हालांकि कांग्रेस यह साफ कर चुकी है कि वो मुलायम के साथ गठबंधन नहीं करेगी लेकिन राजनीति में कोई भी घोषणा अंतिम नहीं होती। पर अगर कांग्रेस ने वाकई सपा को समर्थन नहीं दिया तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति आ जाएगी। यूपीए के लिए सिरदर्द बनी ममता बनर्जी से निपटने के लिए राज्य में कुछ महीनों के राष्ट्रपति शासन के बाद कांग्रेस सपा की सरकार बनवा सकती है। इससे केंद्र सरकार में मुलायम सिंह यादव को कुछ मंत्रालय मिल जाएंगे जबकि उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी का दखल का बढ़ जाएगा। लेकिन यह गठजोड़ भी 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान कमजोर पड़ जाएगा क्योंकि समाजवादी पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की महत्वकांक्षाओं के साथ गठबंधन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। 
कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए सबसे अच्छी स्थिति तब होगी जब उसे 70 के आसपास सीटें हासिल हो। ऐसा हुआ तो वह किंगमेकर की स्थिति में होगी। सपा को सरकार बनाने के लिए पूरी तरह कांग्रेस पर निर्भर होना पड़ेगा और वह सपा से अपनी शर्तों पर सौदेबाजी कर सकेगी। और तो और, राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी अपने उम्मीदवार के लिए सपा से समर्थन मांग सकेगी। यदि कांग्रेस को राज्य में 60 के करीब या इससे काफी कम सीटें मिलती हैं और बसपा-भाजपा मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में आ जाती हैं तब भी कांग्रेस को थोड़ा फायदा यह होगा कि समाजवादी पार्टी केंद्र सरकार के समर्थन के लिए मजबूर हो जाएगी। 
बहुजन समाज पार्टी एग्जिट पोल के नतीजों को असली परिणाम का संकेत मानें तो बसपा उत्तर प्रदेश की सत्ता में लौटती नहीं लगती। कम से कम अपने दम पर तो नहीं ही। ऐसे में बसपा के लिए तो सबसे अच्‍छा यही होगा कि उसे पूर्ण बहुमत मिले। लेकिन यदि पार्टी सरकार बनाने के लिए भाजपा का समर्थन लेने के लिए मजबूर हुई तो इसका असर मायावती की कार्यशैली पर पड़ेगा। वो अब तक अकेले मजबूत फैसले लेने के लिए जानी जाती रही है लेकिन भाजपा के सरकार में शामिल होने पर वो ऐसा नहीं कर पाएंगी। इस स्थिति में बसपा के पास सिर्फ एक ही विकल्प बचेगा कि वो केंद्र में कांग्रेस का समर्थन करे। 
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगर पार्टी बसपा के साथ मिलकर राज्य में सपा की सरकार बनने से रोक ले तो यही उसके लिए अच्छी स्थिति होगी। भाजपा की सीटें उत्तर प्रदेश में लगातार कम होती रही हैं। यदि इस बार उसकी सीटों का आंकड़ा सुधरा तो यह भी उसके लिए अच्छी खबर होगी। 
समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बुरी स्थिति तब होगी जब उसे सरकार बनाने के लिए न सिर्फ कांग्रेस बल्कि राष्ट्रीय लोक दल जैसे अन्य छोटे दलों का भी समर्थन लेना पड़ेगा। या फिर, तब जब बसपा और भाजपा दोनों मिलकर सरकार बनाने लायक सीटें हासिल कर लेंगी। यदि ऐसा हुआ तो सपा एक बार फिर यूपी की सत्ता से दूर हो जाएगी। इसका असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर भी होगा।
 

Saturday, 25 February 2012

कांग्रेस कर रही है एक तानाशाह की तरह बात


उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में तो कांग्रेस इस तरह चुनाव परचार कर रही है मनो जेसे वह धमकी दे रही हो , कांग्रेस के दिग्गज नेता जहा भी चुनाव प्रचार कर रहे है या मीडिया में बयां दे रहे हो हर बात में धमकी से नज़र आरही है |
चाहे वह राहुल गाँधी हो कपिल सिब्बल हो या दिग्ग्विजय सिंह और आखिर में सोनिया गाँधी ही कियो न हो ,राहुल और सोनिया कह रही है अगर उत्तर प्रदेश का विकास चाहिये तो हमारी सरकार हमारी लाओ अगर इन की सरकार नहीं आई  तो ये विकास नहीं करेगे यानि की मायावती जो बुंदेलखंड के लिए जो 80 हज़ार करोड़ के पकेज की बात करती है की केंद्र सरकार ने नहीं दिए यानि की वह सही कहती है इन की सरकार होती तो देते पर उत्तर प्रदेश में सरकार नहीं है तो कुछ भी नहीं मिलेगा  |
कोयला मंत्री जसवाल कहते है सरकार नहीं तो राष्टपति शसन लगा देगे क्यों और कोई सरकार चलाता हुआ सही नहीं लगता क्या? जनता की मर्ज़ी है वह जिस को चाहे मोका दे अगर इसतरह अपनी मनमानी चलाओगे लोकतंत्र का क्या मतलब रह गया ये तो तानाशाही बाली बात हो गयी 
सोनिया अपनी बेटी की सुसराल में आकर दस्तकारो ,शहीदों किसानो की बात करती है चुनाव के ही समय बेटी की सुसराल की याद आई अब से पहले कहा थी चुनाव के ही समय ही बेटी की सुसराल याद आरही है |
और दिग्ग्विजय सिंह का तो कुछ कहना ही नहीं 46 सीटो पर गठबंधन करने वाले दल के नेता को कहा से मुख्या मंत्री बना सकते है |
इन सब बातो का इक ही निचोड़ है निकलता है की चित भी अपनी और पट भी अपनी 
काग्रेस का मतलब है की हम को जीतो नहीं तो कुछ भी नहीं मेलेगा इन की बाते सुन  कर तो 1975 की अम्रेजेंसी की याद दिला दी कही फिर देश को एक बार फिर से अम्रेजेंसी का सामना तो नहीं कर न पड़ जाये , क्या एकबार फिर हमरे देश में तानाशाही नेता उत्पन हो गए है |सत्ता के लालच में ये नेता कुछ भी कह सकते है और कुछ भी कर सकते बड़े बड़े वादे पर सत्ता में आते ही सब भूल जाते है
 

Thursday, 23 February 2012

मुश्किल में है जा, जाने जहाँ, में किया करू


बहुजन समाज पार्टी सरकार की या ये कह सकते है की मुख्यमंत्री मायावती की मुश्किलें दम पे दम बदने पर है पार्टियों के जी सिपेस्लार पर वह सब से जादा भरोसा करते है वाही बहुजन समाज पार्टी की नोक डूबने में लग गए है पहले उनके सब से करीबी बाबु सिंह कुशबाहा और अब  नसीमुद्दीन सिद्दीकी ये मुश्किले भी तब आई है जब उत्तर प्रदेश में विधान सभा चुनाव हो रहे है |
ये समय चुनाव का है चुनाव परचार का है अपनी पार्टियों की उपलब्धिया गेनाने का है मोजुदा सरकार के कम के बारे में बताने का है पर क्या जनता इन की बातो पर अब विश्वाश करेगी , बहुजन समाज पार्टी के २१ मंत्री पहले से है भ्रष्टाचार के मामले में पार्टी से निकले जा चुके है और मंत्री लोक्युक्त की जाच के घेरे में है |लगता है की बहुजन समाज पार्टी की उलटी गिनती शुरू हो गई है पता नहीं की जनता इन पर अब भरोसा करेगी या नहीं आखिरी दोर का चुनाव तो अब बहुजन समाज पार्टी के लिए और मुश्किल भरा हो गया है और मायावती के लिए तो और भी जायदा कियो की वह इन नेताओ की सफाई दे या चुनाव परचार करे | पर इन मुश्किल घडी में भी मायावती को इन का समाधान निकालना आता है ये पहली बार नहीं हो रहा है जब से उन का राजनीती में कदम रखा है तब से उनके सामने मुश्किलें ही मुश्किलें ही आई है खेर ये तो समय नि बतायेगा की इस मुसीवत से मायावती केसे निकलती है 
  
 

Tuesday, 21 February 2012

दिग्विजय करते 'वाक और अभिव्यक्ति' का इस्तेमाल


एसा लगता है की सारे राजनेतिंग पार्टी के बड़े से बड़े नेता को क्या हो गया ही जो मन में होता है बस बोलदिया ये नहीं पता की की क्या बोला बाद में अपनी बात की सफाई देते रहते है की हम ने नहीं कहा मीडिया इस को गलत तरीके से देखा रही है या पेश कर रही है राहुल गन्दी के मामले पर दिग्विजय सिंह ने कहा ही की जन सम्पर्क करना आचार संहिता का उल्लंघन नहीं है ।तो फिर पहले कियो रोड शो की परमिशन ले थी अगर ये गलत नहीं तो पहले रोड शो की परमिशन नहीं लेते जब आचार संहिता का उल्लंघन कर दिया तो ये गलत है और हम अदालत में जायेगे ।
और दूसरी बात से चुनाव आयोग को भी दिग्विजय सिंह ने कटघरे में खड़ा कर दिया है चुनाव के समय पुलिश और प्रशासन पर चुनाव आयोग कम करती है पर दिग्विजय सिंह कहते है की जिला प्रशासन मायावती के इशारो पर काम कर रही है जहा चुनाव आयोग साफ और स्वछ तरीको से चुनाव करा रही है और चुनाव आयोग एक स्वतंत्र प्रणाली है वह किसी के भी दवाब में काम नहीं करती है 
हमारे जो मोलिक अधिकार है और उस में से दूसरा अधिकार वाक और अभिव्यक्ति  का अधिकार इस का सब से जादा फायदा नेताओ के अलाबा कोई नहीं उठता और सब से जायदा दिग्विजय सिंह
इस अधिकार का प्रयोग करते है तभी तो मीडिया में हमेश छाए रहते है किसी का गलत इस्तमाल कर ना बहुत भरी पड़ता है पर दिग्विजय सिंह को इस की आदत हो गयी है कोई कुछ भी कहे इन को कोई फरक नहीं पड़ता है 

  

Friday, 17 February 2012

चुनाव सभा में डांस की मेफिल सजी



विधान सभा चुनाव में लोगो को रोकने के लिए नेता सब नियमो की धज्जिय उड़ाते नज़र आरहे है
कोई चुटकलों की मेफिल लगा रहा है तो कोई लडकियों का डांस करवा रहा है अधिकारियो की नाक के नीचे ये सब होता रहा पर किसी ने कोई आपति नहीं करी जेसा चल रहा है सब इसे है चलता रहा 
जनता को अब ये देख न है की जो लोगों का वोट लेने के लिए ये सब हत्कंडे अपना रहे है वह आगे चल कर किया क्या हत्ख्न्दे अजमाते है इन को केवल वोट चाहिए और बस जीत अब फेसला जनता को ही करना है की उन को साफ छवि वाला नेता चाहिए या ???
ये रैली मेरठ दक्षिण विधानसभा सीट से आरएलडी-कांग्रेस प्रत्याशी मंजूर सैफी की थी। दरअसल इस महारैली में आरएलडी के मुखिया और उड्डयन मंत्री चौधरी अजीत सिंह को आना था। उनके आने का समय 12 बजे रखा गया था, लेकिन वो जब तीन बजे तक भी नहीं आए तो जनता वहां से जाने लगी। पहले तो सबकुछ ठीकठाक चलता रहा लेकिन जब भीड़ नहीं रुकी तो फूहड़ डांस शुरू कर दिया गया।
एक वो भी ज़माना था जब छोटे चौधरी अजीत सिंह को सुनने के लिए लोग तपती धूप में भी घंटो बैठे रहते थे, अब कांग्रेस से गठबंधन भी हो गया, लेकिन छोटे चौधरी का जादू लोगों पर असर करता नहीं दिख रहा है, अजीत सिंह की रैली में भीड़ को रोकने के लिए इस फूहड़ डांस का सहारा लेना पड़ रहा है, आखिर ये चुनावी नैया कैसे पार लगा सकता है, ये तस्वीरें जब कैमरे में कैद हुई तो यहां के आयोजन करने वाले बचते नजर आए, उधर मौके पर ड्यूटी मजिस्ट्रेट भी मौजूद रहे लेकिन सबकुछ देखते हुए भी वो इसे अनदेखा करते नजर आए
इन हालातों को देखकर तो ऐसा लगता है कि आखिर राजनीति किस मुकाम पर आ गई है। राजनेताओं का अपना वजूद भी नजर नहीं आता है और जिन दिग्गज नेताओं के ऊपर पार्टी की पूरी जिम्मेदारी है अगर उन्हें भी फूहड़ डांस का सहारा भीड़ रोकने के लिए लेना पड़ रहा है तो फिर जो उनकी छतरी के नीचे खड़े हैं उनका क्या होगा। सब का भगवान मालिक होगा या ये नेता