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Sunday, 18 March 2012

पच्छिम उ प्र में बसपा बचाओ मुन्कांद अली को हटाओ


बहुजन समाज पार्टी मंडल स्तरीय बैठक आज मुरादाबाद मंडल कार्यालय पर संपन हुई जिसके मुख्या अथिति राज्य सभा संसद और पच्छिम उत्तर प्रदेश के प्रभारी मुन्कांद अली रहे जहा उन्होंने सभी कमेटियो को नए सिरे से बनाने की बात कही और दिश निर्देश भी दिए की किस तरह से पार्टी पदाधिकारी का चयन कारना है |
आज की मीटिंग में चंदौसी के पूर्ब विधायक गिरीश चन्द्र  को नगीना रिजर्वे सिट से लोकसभा का प्रत्यासी घोषित किया गया ,बैठक में पार्टी के कुछ कार्यकर्तो ने जमकर हगामा भी किया वह पार्टी के पद अधिकारियो से नाराज़ थे | किसी तरह से मुन्कांद अली और पद अधिकारियो ने मामला शांत किया, पार्टी के महानगर के कार्यकर्ता चन्दन , महेंद्र सिंह ,विधान सभा अध्यक्ष डालचंद सागर ने मीटिंग के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलने की बात कही और एक नये नारे के साथ सब को एक साथ लेकर बहिन मायावती से मुलाकात करेगे और बतायेगे की अगर पच्छिम उत्तर प्रदेश में पार्टी को बचाना है तो राज्य सभा संसद और पच्छिम उत्तर प्रदेश के प्रभारी मुन्कांद अली को हटाना है पार्टी के जादा तर कार्यकर्त्ता  के विपक्ष में एक साथ खड़े दिखाई दिए | अब देखना है की मायावती अपने पार्टी के कार्यकर्त्ता की बात को सुनती है या पीछले पाच साल की तरह पार्टी के कार्यकर्ताओ से दुरी बना कार रखना है |   
  
 

Monday, 12 March 2012

मुरादाबाद की गुलाबबाड़ी नहीं रही

उत्तर प्रदेश का मुरादाबाद शहर जी तरह से पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है उसे तरह से मुरादाबाद शहर की गुलाबबाड़ी की महक चारो तरफ महका करती थी पर आज यहाँ ना तो गुलाब बचे है ना ही बाड़ी |
ये सब मेरे घर के सामने का हिस्सा था रोज सुबह घर से बहार आने पर तजा फूलो की महक मन को तरोताजा करती थी पर आज घर से बहार निकलने पर चारो तरफ रेता और रेता ही दिखाई देता है| जहा रात को बेला , गुलाब और रात की रानी की महक दूर दूर तक हवा के साथ उडती चली जाती थी बहा आज रेता उढ़ता हुआ दिखाई देता है |  
जहा हजारो बीघा में ये खेती होती थी बही आज केवल ३००० गज जगह बची थी जिसमें गुलाब और फूलो की खेती होती थी पर एक महीने पहले वह भी उजड़ गयी है अब यहाँ पर प्लोटिंग का काम चल रहा है, बढती हुई जनसँख्या और विकसित होते शहर खेत और जंगलो तक पहुच गए है जहा आज पेड़ पोधो की जगह उची - उची इमारते और घर नज़र आते है | क्या कारण है जो हम इन को बचा नहीं पाते और प्रशसन भी कुछ कर नहीं पता
क्या हमे इन को हम अपनी जिन्दगी से अलग करते हुए दुःख नहीं होता है क्या हमारी जरुरत मकान और उची इमारते है ये पेड़ पोधो नहीं है कम से कम इसी जगह को बचाने के लिए हम को और प्रशसन को कुछ ना कुछ जरुर करना चाहिए |
   

Sunday, 11 March 2012

हम तो चले परदेश, हम परदेसी हो गए

हम तो चले परदेश, हम परदेसी हो गए, छुटा अपना देश, हम परदेशी हो गए इस गाने की ये लाइन बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती पर बिलकुल सही बैठती है पार्टी की हर के बाद की गयी समीक्षा बैठक के बाद सब को दुबारा से नए सिरे से प्रदेश की जिमेदारी दी और खुँद ने दिल्ली का रुख कर लिया की अब में दिल्ली देखती हु और तुम प्रदेश देखो |
उत्तर प्रदेश में तानाशही की सरकार चालने के बाद शायद मायावती यही कह रही होगी की बड़े बे अबरू हो कर तेरे कूचे से हम निकले विधान सभा चुनाव में मिली करारी हर के बाद शायद मायावती ने ये तो सबक लिया ही होगा की काम से काम जनता से ना सही अपने पार्टी कार्यकर्त्ता से मिलती ही रहती तो आज इस हर का सामना ना करना पड़ता ,और साथ में काम से काम मीडिया से भी मिलती रहती तब भी प्रदेश और प्रदेश की जनता का हल चल मिलता रहता पर कहते है ना विनाश काल ऐ विपरित बुधि जब विनाश आना होता है तब सही काम भी उल्टा हो जाता है दो दशक बाद कोई सरकार बहुमत की सरकार बना सकी थी और उसका भी ज़रासा भी लाभ मायावती सरकार ने नहीं उठाया और उलटे मुह गिर गयी इस के लिए जितने पार्टी के कार्य कर्ता जिमेदार है उतनी वह खुँद भी है अब नए सिरे से दुबारा पार्टी को खड़ा करना पड़ेगा हर काम में दुगनी मेहनत करनी पड़ेगी पर क्या अखिलेश यादव उनको दुबारा मोका देगे अभी अखिलेश यादव की बातो से ये नहीं लगता की वह आने वाले पाच सालो में ये मोका बहुजन समाज पार्टी को दुबारा देगे |       

Saturday, 10 March 2012

सपा कार्यकर्त्ता का प्रदेश में जमकर उत्पाद


सपा समर्थक जमकर पुरे उत्तर प्रदेश में उत्पाद मचा रहे है 6 मार्च से लेकर अब तक बहुजन समाज पार्टी के कार्यकर्त्ता और दलितों पर तो अत्याचार तो हुए है पर प्रसाशनिक अधिकारी भी इस उत्पाद की भेट चढ़ गए है क्या ये पीछले पाच साल का गुबार है जो सता आते है पार्टी के कार्य कर्ता लोगो पर निकाल रहे है अभी तो शपथ ग्रहण नहीं हुई है और सपा नेता ने दरोगा की पिटाई  कर दी  मुरादाबाद में सपा विधायक आशुतोष आर्य की गाड़ी से एक कांस्टेबल को कुचल दिए जाने की खबर है। इस गाड़ी में विधायक के रिश्तेदार मौजूद थे। मौके पर पहुंचे पुलिसवालों की सपा समर्थकों ने जमकर पिटाई की है
संडीला विधानसभा चुनाव में जीत के बाद जुलूस निकाल रहे कुछ लोग प्रतिद्वन्दी गुट के लोगों से भिड़ गये. 


दोनों पक्षों के बीच गोली भी चली जिससे 30 वर्षीय पप्पू उर्फ गोगा नाम के युवक की मौत हो गयी. गोलीबारी में पांच अन्य व्यक्ति घायल हो गये.
बसपा के पराजित विधायक और प्रदेश सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्योगिक मंत्री अब्दुल मन्नान ने बताया कि मारा गया युवक और घायल हुए लोग बसपा के समर्थक हैं और उन पर सपा समर्थकों ने गोली चलाई है
सीतापुर में एक दलित युवक की लाश पेड़ से लटकी मिली है और हत्या का आरोप स्थानीय विधायक के समर्थकों पर लग रहा है, दलितों के घर जला दिए  वहीं प्रतापगढ़ के कुंडा से विधायक राजा भैया के समर्थकों पर बहुजन समाज पार्टी नेता व भोजपुरी अभिनेता मनोज तिवारी की पत्नि अर्चना तिवारी के ड्राइवर को पीटने के आरोप है। शायद दलित वोट बहुजन समाज पार्टी से इसी लिए नहीं कटता है कम से कम मायावती की सरकार में बो तो अपने आप को सुरक्षित मानते हैऔर बहुजन समाज पार्टी की सरकार में  प्रशसन सब की सुनता है पता नहीं कितनी खबरे है जो मीडिया में छापी नहीं है इस समय पूरा प्रदेश सियासत की आग में जल रहा है अखिलेश जी कुछ करो नहीं तो 2014 भी नजदीक है  |
 

Friday, 9 March 2012

सत्ता की चावी युवा अखिलेश यादव के हाथ में

उत्तर प्रदेश में समाजवादी की सरकार बने जा रही है आज बैठक में अखिलेश यादव को मुख्य मंत्री बनाने पर लगभग मोहर लग गयी है | आज समाज वादी पार्टी उत्तर प्रदेश में एक बदलाब करने जा रही है वह है उत्तर प्रदेश की सत्ता की चावी युवा के हाथ में देने जा रही है अब देखना ये है की ये युवा कितना बदलाव करते है हर कोई चाहता था की अब सत्ता की चावी युवाओ के हाथ में आनी चाहिए सो कुछ ही पलो के बाद उत्तर प्रदेश की बागडोर युवाओ के हाथ में आने वाली है देखना है की ये युवा कितना बदलाब करते है और क्या नई क्रांति लाते है सत्ता में आने के बाद |
अखिलेश यादव एक पड़े लिखे युवा है वह आज के माहोल से वाकिफ है क्या जरुरत है युवाओ की जनता की सब को भली बहती समझते है पर चुनोती बड़ी मुश्किल है कितना खरा उतारते है इस चुनोती पर अब ये देखना है 
और सही भी है जहा सरकारी पोस्टो पर बैठा कोई भी वियक्ति 60-62 सेल की उम्र में रिटायर हो जाता है तो ये लोग जब वह एक ऑफिस का काम नहीं सम्भाल सकता और वह रिटायर हो जाता है तो 60-62 साल का आदमी देश का क्या चला पाएगा इसी लिए देश हो या प्रदेश अब सब जगह युवाओ की भागे- दरी होनी चाहिए | अखिलेश यादव को मुख्या मंत्री बनते है तो सब से पहले जनता दरबार शुरू करना होगा जनता को जितना अपने करीब लायेगे प्रदेश की समस्या को हल कर पाएगे जाती- धर्म से हट कर के सत्ता चली पड़ेगी क्यों की इस बार हर जाती और धर्म को वोट उन को मिला है और अब के दिखाना होगा जो उन पर इलज़ाम हर बार लगाया जाता था वह गलत था  इन को देखते हुए राजनीती करने पड़ेगी तभी आगे और आगे बड़ पाएगे नहीं तो अगले पाच साल बाद फिर चुनाव है    

Tuesday, 6 March 2012

ढका हाथी लाख का खुला हाथी खाक का


उत्तर विधान सभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी अब तक सब को धुल में उड़ाती नज़र आती थी, पर आंधी ज्यादा जोर से आई और खुँद ही उड़ गयी 
सरकार या बहुजन समाज पार्टी को जनता ने नहीं नाकारा और ना ही उन का वोट बैंक इतना कम हुआ है आज भी 28% वोट बैंक उन के पास है 
उत्तर प्रदेश की राजनीती मायावती चला रही थी पर सरकार केवल चार नोकर शाह चला रहे थे जिन्होंने मायावती को केवल दर्शक के रूप में एक कमरे में बंद कर दिया हो और खिड़की पे बेठा दिया हो की यहाँ से बेठ कर खिड़की से बहार देखती रहो की सरकार की नईया केसे दुबई जाती है मायावती का अपने पार्टी कार्यकर्ताओ  से ना मिलना जनता से ना मिलना पार्टी के कार्यकर्ताओ से ज्यदा नोकर शाह पर भरोसा करना यही बात सही में बहुजन समाज पार्टी को लेडूबी और इन सब ने मिलकर खूब भ्रष्टाचार किया ये एक बड़ा मुदा रहा इस चुनाव में विकास को हम नहीं नकार सकते विकास हुआ है आज उत्तर प्रदेश की विकास दर 8.4 है जो कभी नहीं रही | अपने से जादा दुसरो पर भरोसा नहीं करना चाहिए था 2007 में बड़ी उमीद के साथ जनता ने सत्ता की चावी दे थी पर इस को मायावती सम्भाल नहीं पाई और नतीजा आज सब के सामने है |
अब जब सत्ता चली गयी है तो अब मायावती ये ना करे जो हर वार करती है की दिल्ली जा कर बैठ जाती है इस हर पर मंथन किया जाना चाहिए की कहा कमी रह गयी सत्ता चलने में| और ये कहावत उलटी हो गयी की खुला हाथी लाख का ढका हाथी सवा लाख का जेसे ही हाथी को खोला वह खाक का हो गया|      

Monday, 5 March 2012

ओ राजनीती गठजोड़ ,वादा न तोड़


नेताओ ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया की जनता कितनी भोली है चुनावी सभाओ में मीडिया में बस एक ही बात कही हम किसी से भी गठबंधन नहीं करेगे , बहुमत नहीं आया तो हम विपक्ष में बैठेगे ये बात बहुजन समाज पार्टी के अलाबा सभी राजनीती पार्टियों ने कही थी अभी तो नतीजे नहीं आये है और पहला वादा खत्म सब लालची है बस सत्ता चाहिए क्यों की जनता तो भोली है वह बातो में आजाती है और फिर पुरे पाच साल रोती है   
उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे चाहे जो हों, राज्‍य की चार अहम राजनीतिक पार्टियों के लिए इनके क्‍या मायने होंगे, 
समाज वादी पार्टी के लिए बुरी स्थिति तब बनेगी, जब उसकी सीटें 140 के करीब रहती हैं। ऐसे में उसे सत्ता पर काबिज होने के लिए कांग्रेस पर निर्भर होना पड़ेगा। हालांकि कांग्रेस यह साफ कर चुकी है कि वो मुलायम के साथ गठबंधन नहीं करेगी लेकिन राजनीति में कोई भी घोषणा अंतिम नहीं होती। पर अगर कांग्रेस ने वाकई सपा को समर्थन नहीं दिया तो राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू होने की स्थिति आ जाएगी। यूपीए के लिए सिरदर्द बनी ममता बनर्जी से निपटने के लिए राज्य में कुछ महीनों के राष्ट्रपति शासन के बाद कांग्रेस सपा की सरकार बनवा सकती है। इससे केंद्र सरकार में मुलायम सिंह यादव को कुछ मंत्रालय मिल जाएंगे जबकि उत्तर प्रदेश में राहुल गांधी का दखल का बढ़ जाएगा। लेकिन यह गठजोड़ भी 2014 के लोकसभा चुनावों के दौरान कमजोर पड़ जाएगा क्योंकि समाजवादी पार्टी के लिए उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की महत्वकांक्षाओं के साथ गठबंधन बनाए रखना मुश्किल हो जाएगा। 
कांग्रेस उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के लिए सबसे अच्छी स्थिति तब होगी जब उसे 70 के आसपास सीटें हासिल हो। ऐसा हुआ तो वह किंगमेकर की स्थिति में होगी। सपा को सरकार बनाने के लिए पूरी तरह कांग्रेस पर निर्भर होना पड़ेगा और वह सपा से अपनी शर्तों पर सौदेबाजी कर सकेगी। और तो और, राष्ट्रपति चुनाव के लिए भी अपने उम्मीदवार के लिए सपा से समर्थन मांग सकेगी। यदि कांग्रेस को राज्य में 60 के करीब या इससे काफी कम सीटें मिलती हैं और बसपा-भाजपा मिलकर सरकार बनाने की स्थिति में आ जाती हैं तब भी कांग्रेस को थोड़ा फायदा यह होगा कि समाजवादी पार्टी केंद्र सरकार के समर्थन के लिए मजबूर हो जाएगी। 
बहुजन समाज पार्टी एग्जिट पोल के नतीजों को असली परिणाम का संकेत मानें तो बसपा उत्तर प्रदेश की सत्ता में लौटती नहीं लगती। कम से कम अपने दम पर तो नहीं ही। ऐसे में बसपा के लिए तो सबसे अच्‍छा यही होगा कि उसे पूर्ण बहुमत मिले। लेकिन यदि पार्टी सरकार बनाने के लिए भाजपा का समर्थन लेने के लिए मजबूर हुई तो इसका असर मायावती की कार्यशैली पर पड़ेगा। वो अब तक अकेले मजबूत फैसले लेने के लिए जानी जाती रही है लेकिन भाजपा के सरकार में शामिल होने पर वो ऐसा नहीं कर पाएंगी। इस स्थिति में बसपा के पास सिर्फ एक ही विकल्प बचेगा कि वो केंद्र में कांग्रेस का समर्थन करे। 
उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगर पार्टी बसपा के साथ मिलकर राज्य में सपा की सरकार बनने से रोक ले तो यही उसके लिए अच्छी स्थिति होगी। भाजपा की सीटें उत्तर प्रदेश में लगातार कम होती रही हैं। यदि इस बार उसकी सीटों का आंकड़ा सुधरा तो यह भी उसके लिए अच्छी खबर होगी। 
समाजवादी पार्टी के लिए सबसे बुरी स्थिति तब होगी जब उसे सरकार बनाने के लिए न सिर्फ कांग्रेस बल्कि राष्ट्रीय लोक दल जैसे अन्य छोटे दलों का भी समर्थन लेना पड़ेगा। या फिर, तब जब बसपा और भाजपा दोनों मिलकर सरकार बनाने लायक सीटें हासिल कर लेंगी। यदि ऐसा हुआ तो सपा एक बार फिर यूपी की सत्ता से दूर हो जाएगी। इसका असर आने वाले लोकसभा चुनावों पर भी होगा।