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Friday, 27 January 2012

उत्तर प्रदेश में दानियो ने किया दान का ऐलान


उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव क्या आये उत्तर प्रदेश में दानियो की लाइन लग गई है | सारी राजनीतिग पार्टियों ने अपनी झोली खोल के दान करने की बात कर रहे है की अगर सता में आये तो हम ये कर देगे | उत्तर प्रदेश में ४० साल कांग्रेस ,१४ साल भाजपा ,९ साल सपा ,और ७ साल बसपा ने राज किया है इन लोगो ने पहले क्या दिया जो अब देने की बात कर रहे है हर बार चुनाव में केवल सपने ही दिखाए है और इस बार भी सपने है दिखा रहे है | सत्ता जाने के बाद ही क्यों ये सब बाते दिखाई देती है सत्ता में रहते है तो ये सब की ज़रूरत नहीं होती क्या ये सब जनता को दिखने या केवल अपने घोषणा पत्र में छाप ने के लिए ही होता है भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आई तो पिछड़े वर्ग के 27 फीसदी आरक्षण के तहत मुस्लिमों को दिए गए 4.5 फीसदी के आरक्षण को खत्म करेगी। उमा भारती, सूर्य प्रताप शाही, 
अयोध्या में राम मंदिर के बारे में भी एक पैराग्राफ में जिक्र किया गया है।  वरिष्ठ नेता ओम प्रकाश सिंह ने कहा, 'सत्ता में आए तो शुचिता, सामाजिक न्याय और समरसता, अंत्योदय और समता आधारित विकास देंगे। हम ईमानदार, संवेदनशील प्रशासनिक व्यवस्था का वादा करते हैं। सत्ता में आए तो पिछड़े वर्ग के 27 फीसदी के आरक्षण को फिर से बहाल करेंगे।' । किसानों को 24 घंटे बिजली की आपूर्ति सुनिश्चित करेंगे। किसानों को मुफ्त सिंचाई की सुविधा दी जाएगी। 1000 करोड़ रुपये के किसान कल्याण कोष बनाएंगे। कृषक कल्याण आयोग बनाएंगे। ब्लॉक पर कम दरों पर अपनी फसल बेचने को बाध्य न हो, इसलिए ब्लॉक स्तर पर न्यूनतम दरों पर गोदाम बनाए जाएंगे।'
और सपा ने भी कुछ इस ही तरह घोषणा के है  किसानो को मुफ्त बिज़ली,छोटे और सीमांत किसानों को कृषि कार्य के लिए चार प्रतिशत पर ऋण का आश्वासन दिया है साथ ही कहा है कि 65 साल की उम्र से किसानों को भी पेंशन मिलेगी। रिक्शा चालकों के लिए विशेष योजना शुरू की जाएगी |
जिसमें 12वीं पास करने वाले छात्रों को नि:शुल्क लैपटॉप, 10 पास करने वाले छात्रों को टैबलेट, मुसलमानों के लिए जनसंख्या के आधार पर आरक्षण, बेरोजगारों के लिए बेरोजगारी भत्ता, मेधावी छात्राओं के लिए कन्या विद्या धन, किसानों को पेंशन एवं कर्ज देने का वादा किया गया है। पार्टी ने स्नातक स्तर तक लड़कियों को मुफ्त शिक्षा का भी वादा किया हैपार्टी ने  सपा ने घोषणा पत्र में वादा किया है कि किसानों की मर्जी के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं होगा। साथ ही कहा है कि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को सर्किल रेट से छह गुनी अधिक कीमत दी जाए |जब प्रदेश पर इतने साल राज किया तब ये सब क्यों नहीं किया हर बार अपने पत्र में इन बातो को उठाया पर पूरा नहीं क्या तो अब जनता केसे विश्वाश कर ले |

Wednesday, 25 January 2012

राहुल द्रविड़ लगातार चौथी बार क्लीन बोल्ड


ऑस्ट्रेलिया की इस अनुभवी जोड़ी की यह साझेदारी इस मैदान पर रिकॉर्ड है। इससे पहले यहां साउथ अफ्रीका के ग्रीम पोलॉक और एडी बारलो की जोड़ी ने 1963-64 सीरीज में तीसरे विकेट के लिए 341 रन जोड़े थे। यह जोड़ी हालांकि चौथे विकेट के ऑस्ट्रेलियाई रिकार्ड को तोड़ने से चूक गई, जो सर डॉन ब्रैडमैन और बिल पोन्सफोर्ड के नाम है। उन्होंने 1934 में हेडिंग्ले में इंग्लैंड के खिलाफ 388 रन जोडे़ थे। ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को 3 विकेट पर 335 रन से आगे खेलना शुरू किया और जहीर खान व इशांत शर्मा की गेंदबाजी जोड़ी के खिलाफ 7 रन प्रति ओवर से अधिक की दर से रन जुटाए। इशांत ने अपने पहले तीन ओवर में 20 रन के दिए , जिसके बाद सहवाग ने उन्हें बोलिंग से हटा दिया लेकिन पॉन्टिंग और क्लार्क ने उमेश यादव के खिलाफ भी आसानी से रन बनाए। 
 मैच के दूसरे दिन ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों के बाद गेंदबाजों ने भी शानदार प्रदर्शन किया। पहली पारी में ऑस्ट्रेलिया के 604/7 के जवाब में भारत ने दूसरे दिन का खेल खत्म होने तक दो विकेट के नुकसान पर 61 रन बनाए हैं। गौतम गंभीर 30 और सचिन तेंडुलकर 12 रन पर नॉट आउट हैं। 
भारत ने अपने दो विकेट 31 रन पर ही गंवा दिए। भारतीय बल्लेबाजी की दीवार के नाम से मशहूर रहे होकर आउट हुए। 7 वें ओवर की अंतिम गेंद पर हिल्फेनहास ने उन्हें 1 रन पर बोल्ड किया। महेंद्र सिंह धोनी की गैरमौजूदगी में टीम के कप्तान वीरेंद्र सहवाग को भारतीय पारी के दूसरे ही ओवर में जीवनदान मिला। हिल्फेनहास की गेंद पर एड कोवन ने उनका कैच गिरा दिया था , लेकिन वह इसका फायदा नहीं उठा सके। पीटर सिडल ने छठे ओवर की पहली गेंद पर सहवाग को रिटर्न कैच से आउट किया। सहवाग ने 18 रन बनाए। 
ऑस्ट्रेलिया ने बुधवार को 3 विकेट पर 335 रन से आगे खेलना शुरू किया और जहीर खान व इशांत शर्मा की गेंदबाजी जोड़ी के खिलाफ 7 रन प्रति ओवर से अधिक की दर से रन जुटाए। इशांत ने अपने पहले तीन ओवर में 20 रन के दिए , जिसके बाद सहवाग ने उन्हें बोलिंग से हटा दिया लेकिन पॉन्टिंग और क्लार्क ने उमेश यादव के खिलाफ भी आसानी से रन बनाए। 
पॉन्टिंग ने इसके बाद यादव की गेंद को स्क्वायर लेग पर पुल करके चार रन के लिए भेजकर 357 गेंद में भारत के खिलाफ तीसरी डबल सेंचुरी पूरी की। लक्ष्मण ने इसके बाद अश्विन की गेंद पर पॉन्टिंग का कैच छोड़ा। माइकल हसी (25) ने अश्विन की गेंद को स्लिप और गली के बीच से चार रन के लिए भेजकर टीम का स्कोर 500 रन के पार पहुंचाया लेकिन वह इसी ऑफ स्पिनर के अगले ओवर में पॉन्टिंग के साथ गलतफहमी का शिकार होकर रन आउट हो गए। 
  



Tuesday, 24 January 2012

मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश का ही होगा


पहले जनता और फिर विपक्ष और खुद भाजपा ये कहती नज़र आ रही है की उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री जो भी होगा वह कोई भी बाहरी नहीं होगा ये इशारा उमा भारती की तरफ करते हुए कलराज मिश्रा ने मंगलवार को मीडिया के सामने कही की भारती को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि वह यूपी की नहीं हैं, बाहरी हैं     
बीजेपी वाइस प्रेजिडेंट कलराज मिश्रा का, जो खुद गद्दी की दौड़ में अहम उम्मीदवार बताए जा रहे हैं। हालांकि मंगलवार को मीडिया में मिश्रा का वह बयान छाया रहा जिसमें उन्होंने यूपी की भावी मुख्यमंत्री के तौर पर । 
बीजेपी अध्यक्ष नितिन गडकरी ने एलान किया था कि यूपी चुनाव स्टेट यूनिट प्रेजिडेंट सूर्य प्रताप शाही, पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह, कलराज मिश्रा और उमा भारती की अगुआई में लड़े जाएंगे। इससे अंदाजा लगाया जा रहा था कि पार्टी इन्हीं में से किसी को यूपी की बागडोर सौंपेगी। इस बयान पर चर्चा करते हुए मिश्रा ने कहा कि चूंकि शाही पहले ही स्टेट यूनिट के प्रेजिडेंट हैं इसलिए वह एक साथ दो पद नहीं रख सकते, राजनाथ सिंह पहले ही कह चुके हैं कि मैं राज्य स्तर की राजनीति में हिस्सा नहीं लूंगा और लोध समुदाय की साध्वी उमा भारती मध्य प्रदेश की मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। हालांकि इसके बाद मिश्रा ने यह भी जोड़ा कि इसका मतलब यह नहीं है कि वह उम्मीदवार के रूप में अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं। 
असल में जब से गडकरी ने एलान किया है कि उमा महोबा की चरखारी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ेंगी, तभी से ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि वह भावी मुख्यमंत्री हो सकती हैं। इसे इस बात से और मजबूती मिलती है कि वह ओबीसी नेता है और फिलहाल बीजेपी जी-जान से इस वर्ग को लुभाने में जुटी हुई है। 
कुछ दिन पहले ही राहुल गांधी ने भी उमा भारती को यूपी से बाहर का बताया था, जिस पर उमा भारती ने राहुल को जवाब दिया था कि अगर सोनिया गांधी इटली से भारत आ सकती हैं तो वह मध्य प्रदेश से उत्तर प्रदेश क्यों नहीं। अब वह कलराज मिश्रा  को क्या जवाब देगी इस के लिए उन को जवाब ख़ोज ना पड़ेगा ।

Monday, 23 January 2012

सरे रिकार्ड टूटेगे 300 छोटे दल मैदान में



प्रदेश के चुनावी इतिहास पर नजर डालें तो पाएंगे कि वर्ष 1985 के बाद से चुनाव मैदान में छोटे दलों की संख्या लगातार बढ़ी है. साल 1985 में जहां सिर्फ दो गैर पंजीकृत पार्टियों ने चुनाव लड़ा था, वहीं वर्ष 2007 में हुए पिछले विधानसभा चुनाव में छोटे दलों की तादाद 111 तक पहुंच गयी.
छोटे दलों राजनीतिक दल को पहली और प्रभावी कामयाबी वर्ष 1969 के चुनाव में चौधरी चरण सिंह की अगुवाई वाले भारतीय क्रांतिदल को मिली, जो 98 सीटों पर जीत दर्ज करने के साथ राज्य की 425 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी.
सूबे में जातिवादी राजनीति की शुरुआत रिपब्लिकन पार्टी ने की थी आगे चलकर उसका कांग्रेस में विलय हो जाने के बाद इस रंग-ओ-बू की सियासत करीब डेढ़ दशक तक खामोश रही.
वर्ष 1985 में बहुजन समाज पार्टी के प्रादुर्भाव और उसकी सफलता ने जाति विशेष में थोड़ा-बहुत प्रभाव रखने वाले सियासी लोगों का मनोबल बढ़ाया और अपना दल, राष्ट्रीय स्वाभिमान पार्टी, इंडियन जस्टिस पार्टी तथा लोक जनशक्ति पार्टी के गठन के साथ जातिवाद की लहलहाती फसल को काटने के लिये सियासी दल बनाने का सिलसिला चल निकला.
प्रदेश में राम मंदिर आंदोलन की शुरुआत के बाद धर्म आधारित राजनीति करने वाले दलों का भी उभार शुरू हुआ और इस मैदान में शिवसेना और उलमा कौंसिल जैसे दलों ने भी किस्मत आजमाने की कोशिश की और पिछले लोकसभा चुनाव में कुछ अंचलों में प्रभाव के साथ उभरी डॉक्टर अयूब की पीस पार्टी को भी इसी मैदान का खिलाड़ी माना जा रहा है, हालांकि इसके पदाधिकारियों में लगभग सभी जातियों और धर्मो के अनुयायी शामिल हैं. राज्य के आगामी विधानसभा चुनाव में पीस पार्टी, अपना दल और इंडियन जस्टिस पार्टी जैसे कुछ प्रभावशाली दल रणनीति बदलते हुए समान विचारधारा वाली कई पार्टियों के साथ गठबंधन करके मैदान मारने की फिराक में हैं.
चुनाव आयोग की रिपोर्टों के मुताबिक वर्ष 1952, 1957 और 1967 में विधानसभा चुनाव में किसी भी गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल ने चुनाव नहीं लड़ा.
वर्ष 1962 के विधानसभा चुनाव में हिन्दू महासभा, रिपब्लिकन पार्टी और राम राज्य परिषद नामक गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दलों ने कुल 237 उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा. इनमें से रिपब्लिकन पार्टी को आठ जबकि हिन्दू महासभा को दो सीटें मिलीं जबकि राम राज्य परिषद की झोली खाली रही. इन छोटी पार्टियों को कुल 5.09 प्रतिशत वोट मिले.
साल 1969 के विधानसभा चुनाव में 16 छोटे दलों के 658 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा जिनमें से 100 ने कामयाबी हासिल की. उनमें से चरण सिंह की अगुवाई वाले भारतीय क्रांतिदल ने 402 सीटों पर चुनाव लड़कर 98 सीटें जीत लीं. उस चुनाव में छोटे दलों के हिस्से में कुल 23.41 फीसद वोट आए. हालांकि इससे प्रमुख पार्टियों के मतों पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा और कांग्रेस ने 425 में से 211 सीटें जीतकर आसानी से सरकार बनाई. वर्ष 1974 के विधानसभा चुनाव में 15 छोटी पार्टियों ने कुल 368 उम्मीदवार उतारे जिनमें से 360 की जमानत जब्त हो गयी और सिर्फ दो उम्मीदवारों की ही चुनावी वैतरणी पार लग सकी. इस चुनाव में छोटे दलों को मात्र 2.18 प्रतिशत वोट मिले.
छोटे दलों का1977 से लेकर 2007 तक आकड़ा 
वर्ष 1977 के चुनाव में सात छोटी पार्टियों ने 111 उम्मीदवार उतारे जिनमें से 110 की जमानत जब्त हो गयी. इन चुनाव में ये दल खाली हाथ रहे और उनका वोट प्रतिशत 0.77 फीसद रहा.
वर्ष 1980 के विधानसभा चुनाव में सात छोटे दलों के 60 उम्मीदवारों में से एक जीतने में कामयाब रहा जबकि 58 की जमानत जब्त हो गयी. इन दलों के प्रत्याशियों का कुल वोट प्रतिशत 0.45 प्रतिशत रहा.
वर्ष 1985 के चुनाव में दो पार्टियों ने कुल 354 सीटों पर चुनाव लड़ा जिनमें से सभी सीटों पर उनके प्रत्याशी अपनी जमानत भी नहीं बचा सके.
वर्ष 1989 के चुनाव में 31 छोटे दलों ने कुल 936 उम्मीदवार खड़े किये जिनमें से सिर्फ 15 ही जीत हासिल कर सके और उनका वोट प्रतिशत 11.36 प्रतिशत रहा यह वह दौर था जब कांग्रेस ने एकछत्र राज किया. राज्य में उसके पतन के बाद छोटे दलों की संख्या में बढ़ोत्तरी हुई और उनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती गयी.
वर्ष 1991 के विधानसभा चुनाव में 34 छोटे दलों ने कुल 645 उम्मीदवार खड़े किये जिनमें से सिर्फ दो जीत सके और 641 की जमानत जब्त हो गयी. उनका वोट प्रतिशत ।.09 रहा. वर्ष 1993 में 59 छोटे दलों के कुल 1205 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा जिनमें से 110 ने जीत हासिल की. उस वक्त मुलायम सिंह यादव की अगुवाई वाले गैर मान्यता प्राप्त पंजीकृत दल समाजवादी पार्टी (सपा) ने 109 सीटें जीती थीं. उस चुनाव में छोटे दलों का कुल वोट प्रतिशत 19.42 प्रतिशत रहा.
वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में 61 छोटे दलों ने कुल 1102 उम्मीदवारों को खड़ा किया जिनमें से 11 ही जीत सके. इस तरह उनका वोट प्रतिशत 5.63 रहा.
वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में 58 छोटी पार्टियों ने 1332 प्रत्याशी उतारे जिनमें से 29 ने जीत हासिल की. चुनाव में इन पार्टियों का कुल मत प्रतिशत 12.34 रहा.
वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा 111 छोटे दलों ने चुनाव में हिस्सा लिया. इन पार्टियों ने कुल 1356 प्रत्याशी उतारे जिनमें से सिर्फ सात जीते और 1329 की जमानत जब्त हो गयी. इन दलों का वोट प्रतिशत 6.37 रहा.
प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में करीब 300 छोटे दल ताल ठोंक रहे हैं जो प्रदेश में जातिवादी राजनीति की जड़ों की गहराई की तरफ इशारा करता
उत्तर प्रदेश में 80 के दशक के बाद से जातिवादी राजनीति के परवान चढ़ने के साथ ही सियासी महत्वाकांक्षाएं लेकर जन्म लेने वाले छोटे दलों की संख्या में निरंतर बढ़ोत्तरी हुई है,
छोटे दलों का चुनाव मैदान में उतरने की शुरुआत वर्ष 1962 में हुए राज्य के तीसरे विधानसभा चुनाव में दलित आधारित राजनीति करने वाली रिपब्लिकन पार्टी और दक्षिणपंथी विचारधारा वाली हिन्दू महासभा एवं राम राज्य परिषद के मैदान में उतरने के साथ हुई. तब रिपब्लिकन पार्टी को आठ सीटें मिली थीं और हिन्दू महासभा को दो जबकि राम राज्य परिषद खाली हाथ रह गयी थी.

Friday, 20 January 2012

मुलायम की दुकान में सपने की कीमत एक वोट

एसा लग रहा है मनो इस बार मुलायम सिंह ने चुनावी सब्जी मण्डी खोल ली है इस बार दुकान को बड़ी ही सही ढंग से सजाया है और सब की कीमत रखी है सिर्फ एक वोट, उत्तर प्रदेश विधान सभा के चुनाव को मुलायम सिंह ने सब्जी मण्डी बना दिया है जहा बहुत सारी सब्जी रखी  है जिस को चाहिए वह वोट दे और सब्जी ले जा इन होने जो सब्जी के नाम रखे है वह है किसानो को मुफ्त बिज़ली,छोटे और सीमांत किसानों को कृषि कार्य के लिए चार प्रतिशत पर ऋण का आश्वासन दिया है साथ ही कहा है कि 65 साल की उम्र से किसानों को भी पेंशन मिलेगी। रिक्शा चालकों के लिए विशेष योजना शुरू की जाएगी |
जिसमें 12वीं पास करने वाले छात्रों को नि:शुल्क लैपटॉप, 10 पास करने वाले छात्रों को टैबलेट, मुसलमानों के लिए जनसंख्या के आधार पर आरक्षण, बेरोजगारों के लिए बेरोजगारी भत्ता, मेधावी छात्राओं के लिए कन्या विद्या धन, किसानों को पेंशन एवं कर्ज देने का वादा किया गया है। पार्टी ने स्नातक स्तर तक लड़कियों को मुफ्त शिक्षा का भी वादा किया हैपार्टी ने  सपा ने घोषणा पत्र में वादा किया है कि किसानों की मर्जी के बिना भूमि अधिग्रहण नहीं होगा। साथ ही कहा है कि अधिग्रहण की स्थिति में किसानों को सर्किल रेट से छह गुनी अधिक कीमत दी जाए | मुलायम सिंह की दुकान में बहुत कुछ है पिछली बार नुकसान उठाने के बाद वह नहीं चाहते की दुबारा उनकी दुकान पर ग्राहक न आये इस लिए उन्होंने बहुत सारी वेरायटी रख रखी है अब कोई भी ग्राहक बापस नहीं जायेगा मुलायम सिंह को पिछले 9 साल जब राज किया तब जे सब क्यों याद नहीं आया जो अब याद आ रहा है या केवल इस बार भी चुनावी सब्जी बेच रहे है |  

Thursday, 19 January 2012

बुंदेलखंड के चक्कर में अमेठी न भूल जाना


आज जो राहुल गाँधी ने कहा है की कोई बुंदेलखंड का दर्द नहीं जानता में जानता हु, इस में कितनी सचाई है ये तो पता नहीं पर राहुल जी क्या अपने क्षेत्र का हल जानते है वहा की भी जनता भी रोजी रोटी के लिए सडको पर उतर आई है दो दिन पहले उनकी बहिन के सामने वहा की जनता ने अपना दुखड़ा रोया है 
आज राहुल गाँधी ने कहा मतदाताओं से सुश्री उमा भारती जैसी नेताओं से सावधान रहने को भी कहा। कांग्रेस महासचिव ने कहा कि बुंदेलखंड का दर्द उनसे ज्यादा कोई नहीं जानता। इस इलाके के लोग जब सूखे और कर्ज से परेशान थे तब उनका हाल जानने किसी राजनीतिक दल का नेता नहीं आया।
मुलायम सिंह यादव और मायावती केवल आपने अपने घर पर ही बैठ कर बुंदेलखंड का रोना रोते रहे यहाँ देखने कोई नहीं आया और अब मध्य प्रदेश से उमा भारती आई है इनको भी चुनाव के समय बुंदेलखंड की याद आ रही है चुनाव से पहले कहा थी |
इन को तो खुद मध्य प्रदेश निकला गया है अब उत्तर प्रदेश को देख ने आई है उमा भारती बुन्देलखण्ड का रोना तो रो रही है लेकिन कभी यहाँ आकर नहीं झाका , उन्होंने दावा किया कि इलाके के लोगों का दर्द जानने वह ही यहां आये। बुंदेलखंड की बदहाली को देखने के बाद ही उन्होंने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से विशेष पैकेज के बारे में बात की।
किसानों को मिले ट्रैक्टर मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के परिवार वाले ले गये और गरीब लोगों को बीमार बकरियां दे दी गयीं।
उन्होंने कहा कि कागजों पर कुएं खोदे गये और उसकी रकम सरकार के मंत्री और अधिकारी खा गये। यदि इसकी जांच नहीं होती तो गरीबों के लिये दिये गये पैसे के घोटाले का पता भी नहीं चलता।
श्री गांधी ने कहा कि वह यहां राजनीति करने या सिर्फ वोट मांगने नहीं आये हैं। राज्य के विकास के लिये वे चिंतित हैं | पर राहुल गाँधी ने पेपर या न्यूज़ देखने का शायद समय नहीं मिल रहा है इस तरह से उमा भारती को यहाँ लाया गया है और उन्होंने ने बुंदेलखंड को आकर नहीं देखा तो राहुल जी आप के संसदीय क्षेत्र में भी आप का विरोध हो रहा है लोग वहा भी रोज़ी रोटी के लिए तरस रहे है एसा न हो की बुंदेलखंड के चक्कर में अमेठी को भूल जाओ।  

Wednesday, 18 January 2012

छोटे दल हार जीत का समीकरण बदल देते है


उत्तर प्रदेश विधान सभा क्या हर प्रदेश के विधान सभा चुनाव में छोटे छोटे राजनेतिक दल हार जीत का समीकरण बदलने में अहम् भूमिका रहेती है उत्तर प्रदेश चुनाव में मुख्यता भूमिका भाजपा ,बसपा सपा और कांग्रेस की रहती है लेकिन कई पार्टियों की हर का कारण इन छोटे छोटे दलों के प्रत्याशियों की और से हुई क्योकि यह दल ओसतन पाच फीसदी तक वोट कटोती करते है भले है यह दल नतीजो  में सब से नीचे दिखाई देते हो चुनावी चोपलो से लेकर उम्मीदवारो के अंकगणित का हिस्सा जरुर बनते है 
यह सारी पार्टिया का गठन बड़ी पार्टियों से रुसवा हुए और कई दिग्गज ने इन पार्टियों का गठन किया  तथा कुछ ने इस में शरण ली | पर बड़ी पार्टियों में भीतर घात के कारण यह दल अपनी जीत का आधार तलाश कर लेते है वेसे इन का प्रमुख कार्य सक्रिय और बड़ी पार्टियों के प्रत्याशियों को हराने के लिए काफी है