rediff

click here

rediff2

click here

times

shardul

click here

Sunday, 13 August 2017

स्वतंत्रता दिवस पर कुछ गुमनाम शहीदों को नमन

मुरादाबाद:- हम भारत की आजादी का 70 वा जश्न मनाने की तैयारी कर रहे है बस कुछ ही समय बाद भारत के 125 करोड़ लोग तिरंगा फहराकर भारत आज़ादी के जश्न में डूब जायेगे।  एक बार आज़ाद मुल्क में हम सांस लेकर हम उन शहीदों को याद करेंगे जिनकी कुर्बानियों से हमको आजादी मिली उसके लिए हमारे पूर्वजों ने कितनी ही कुर्बानियां दी उसमे से हमे कुछ कुर्बानी याद हैं, और कुछ कुर्बानी इतिहास के पन्नो में गुम हो गयी। हमने मुरादाबाद में ऐसी ही गुम कुर्बानीयो को जानने की कोशिश की गयी। आज़ादी की लड़ाई में मुरादाबाद की सरजमीं पर भी लोगो ने अपने प्राणों को हंसते हंसते न्योछावर कर दिया । लेकिन देश के ही कुछ गद्दारों ने देश से गद्दारी कर देश के लिए लड़ने वालों को शहीद करा दिया।

नबाब मज्जू खां का जो बहादुरशाह जफर के सूबेदार थे, और जून 1857 में अंग्रेजों को नैनीताल भागने पर मजबूर कर दिया था। लेकिन उसके बाद रामपुर के नबाब की फौज की मदद से अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बनाकर मौत के घाट उतार दिया था। जिसकी कहानी आज भी गलशहीद में उनकी मजार पर मौजूद है।
शहर के इतिहासकार जावेद रशीदी बताते हैं कि 1857 के ग़दर में नबाब मज्जू खान ने अंग्रेजों के छक्के छुड़ा दिए थे और यहां बहादुरशाह जफर का झंडा लहरा दिया था। लेकिन बाद में अंग्रेजों ने उन्हें बंदी बनाकर गोलियों से भूना, यही नहीं उनका शव चूने की भट्टी में झोंक दिया था, जब इससे भी दिल नहीं भरा तो उनके पार्थिव शरीर को हाथी से पांव में बांधकर पूरे शहर में घुमाकर गलशहीद तक लाया गया, यहां लगे इमली के पेड़ में फाँसी पर लटका दिया था। यही नहीं जितने लोगों ने अंग्रेजों की खिलाफत की थी उन सभी को मारकर गलशहीद के इमली के पेड़ में सर काट कर टाँग दी जाती थी । इसी कारण आज इलाके को गलशहीद कहते हैं।
इतिहासकार जावेद रशीदी कहते हैं कि मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था ने मज्जू खां जैसे क्रांतिकारी का आज कहीं कोई स्थान नहीं मिला। लेकिन अब इस ऐतिहासिक विरासत और इस इतिहास को संजोने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं।बहरहाल जश्न ए आज़ादी में ऐसे शहीदों को नमन करना भी हमारा फर्ज।

2:- सूफी अम्बा प्रसाद के पिता गोविंद प्रसाद भटनागर  मुरादाबाद के अगवानपुर के रहने वाले थे 1835 में वह शहर के कानून गोयन मोहल्ले में आकर रहने लगे थे। यहा आकर उन्होंने अपना छापा खाना यानिकि अपना अखबार चलाने के लिए प्रिंटिंग मशीन लगायी। सूफी अम्बा प्रसाद का जन्म 1858 में माना जाता है। जिनको हिंदी, उर्दू, फ़ारसी का बहुत अच्छा ज्ञान था। 1887 में उन्होंने सितारे हिन्द अखबार निकाला था, 1890 में जमा बुल उलूम नाम से पत्रिका शुरू की थी अखबार ओर पत्रिका दोनो उर्दू में थी। अखबार के माध्यम से वह लोगो को आजादी की लड़ाई के लिए प्रेरित करते थे। अंग्रेजो को यह बात अच्छी नही लगी और अम्बा प्रसाद को गिरफ्तारी के लिए अंग्रेज दबिश देने लगे। अंग्रेजो से बचने के लिए 1905 में मुरादाबाद से पंजाब निकल गए। इनकी मृत्यु ईरान में हुई थी।  जहाँ आज भी ईरान में उनकी मजार पर मेला लगता है। कानून गोयन में छापा खाना है।
3:- सन 1930 मे नमक सत्यग्रह आंदोलन चलाने के लिए मुरादाबाद के टाउनहाल पर हजारों की संख्या में लोगो एकत्र थे अंग्रेजो ने इन आंदोलनकारियो को तीतर बितर करने के लिए गोली चलवा दी जिसमें मदन मोहन, रहमत उल्लाह, लतीफ अहमद, नजीर अहमद, वा चार गुमनाम लोगो जिनका अता पता नही चला शाहिद हो गए। इसी के विरोध में जमामस्जिद पर सेकड़ो लोगो की गिरफ्तार कर लिया गया।
4:- 9 अगस्त 1942 को मुरादाबाद जिले के लोगो को गिरफ्तार कर लिया था इसी के विरोध में 10 अगस्त को राम मोहन लाल के नेतृत्व में एक जुलूस निकाला जा रहा था। पान दरीबा पर जुलूस निकाल रहे लोगों को तीतर बितर करने के लिये अंग्रेज डीएम, वा पुलिस कप्तान बौरबाल ने गोली चलवा दी जिसमे मोती लाल, मुमताज खा, झाऊलाल, राम प्रकाश वा 11 वर्षीय जगदीश शाहिद हो गए। सेकड़ो घायल आंदोलन कार्यकर्ताओ को गिरफ्तार कर लिया गया। सेकड़ो शहीदों का अतापता तक नही चला । जिसके विरोध में कांकाठेर व मछरिया रेलवे स्टेशन जला दिया गया। शहीदों की याद में है पान दरीबा पर शहीद स्मारक बना हुआ है।


Sunday, 21 June 2015

योग का नहीं तारीख का विरोध।


योग का विरोध नहीं तारीख का विरोध ।
आज समूचा विश्व योग दिवस मना रहा है ।इस की शुरुवात भी भारत ने की यह भी सब जानते है पर योग दिवस की तारीख 21 जून क्यों रखी गयी यह ज्यदा तर नहीं जानते होंगे। में आप को बताता हूँ।
आरआरएस के संस्थापक डॉ केशवराव बलिराम हेड गेवर थे  जिनका जन्म 1 अप्रैल 1889 को नागपुर में हुआ था और इन की मृत्यु 21 जून 1940 को हुई थी इन का योग से कोई सम्बन्ध नहीं था यह बहुत मोटे थे वा इन की तोंद निकली हुई थी इन की मोत डायबिटीज होने कारण हुई थी । क्यों की आरआरएस वाले इन का जन्म दिन मानते नहीं है क्योकि वह दी अप्रैल फूल के रूप में दुनिया में मनाया जाता है इसी लिए 21 जून को योग दिवस रखा गया है आने वाले सालो में यह हम को देखने को मिलेगा की योग दिवस के बेनर और पोस्टरों पर आरआरएस के संस्थापक डॉ केशवराव बलिराम के फोटो दिखाई देगे और योग दिवस के साथ समूचा विश्व पुण्यतिथि मनाता नज़र आएगा । में योग का विरोधी नहीं और ना ही योग ना करने के लिए कह रहा हूँ विरोध है तो केवल तारीख का । योग पर जितने भी परीक्षण हुए है उस में पाया गया है कि योग सब से ज्यादा जो देश बुद्ध को मानते उस देशो में योग और मार्शल आर्ट ज्यादा किया जाता है । पतंजलि ने भी योग लालन्दा विश्विद्याल में जा कर बुद्धिस्टों से सीखा था । जब समूचा विश्व इस बात को जनता है तो योग दिवस का दिन बुद्धपूर्णिमा के दिन मनाया जाना चाहिए क्यों की योग भी बुद्ध की देन है ।

Friday, 15 November 2013

नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी कि जुबानी जंग

भारत कि दो सब से बड़ी राजनीतिक पार्टियां बाजपा और कांग्रेस लोकसभा चुनाव कि तैयारी कुछ इस तरह से कर रहे है कि दोनों ही पार्टिया के नेता आज कल पुरे भारत में जनसभा करके देश कि जनता को ये बता रहे है कि कोन सही है और कोन गलत बाजपा के नरेंद्र मोदी कॉग्रेस पर निसाना साधते हुए कांग्रेस कि बुराइयां करते हुए नज़र आते है । कांग्रेस के राहुल गांधी कांग्रेस कि उपलब्धियां गिनाते हुए नज़र आते है पर दोनों में से किसी ने आभी तक ये नहीं कहा है कि देश इस समय जिस संकट से गुजर रहा है उस से देश को किस तरह से निज़ात दिलायेगे आरोप प्रत्यापरोप तो खूब लगाये जा रहे है पर दोनों में से ये कहने को और बताने को कोई राज़ी नहीं है किस तरह कि योजनाओ को आगे भाविष्य में लागु करेगे जिस से देश कि अर्थव्यवस्था में सुधार आये किस तरह से बढ़ती कीमतो को कम किया जाये । सीमा पर पाकिस्तान और चीन से बढ़ते विवाद को किस तरह से कम किया जाये या खतम किया जायेगा , ऐसी कोन कोन से योजनाओ को लागु किया जाये जिस से देश के किसान को फायदा पहुँचे रोजगारो के अवसर बड़े भ्रष्ट्राचार से मुक्ति मिले और आतंकवाद को किस तरह से ख़तम किया जाये । ऐसे ना जाने कितने मुद्दे है जिस के बारे में इस देश कि जनता जानना चाहती है पर दोनों में से कोई भी इन बातो को बता रहा है और ना ही जबाब दे रहै बस सत्ता के लालच में ये दोनों एक दूसरे पर आरोप लगा रहे है ।

Friday, 12 April 2013

शहीद हरभजन की आत्मा देती है पहरा

कहते है की मरने के बाद आत्मा शारीर का साथ छोड़ देती है और अगर मरने वाले के मन में मरते समय कोई आखरी इच्छा रह जाती है तो उसकी आत्मा भटक ती
रहती है । जी हा ऐसी  ही कुछ  कहानी है सेना मुख्यालय के अधिकारी बाबा हरभजन सिंह की 1968 में सिक्किम के नाथुला दर्रे के पास घोड़ों को ले जाते वक्त नदी में गिरने से उनकी मौत हो गई थी। उसके बाद कई फौजियों ने दावा किया कि उन्हें हरभजन ने चीनी घुसपैठ के बारे में अहम सैन्य सूचनाएं दीं।
सेना में बीते 45 साल से एक ही मोर्चे पर तैनात हरभजन सिंह अब जवान से कैप्टन बन गए हैं। चीन सीमा पर नाथुला दर्रे पर जान गंवाने वाले इस सिख फौजी को आस्थाओं ने न केवल जिंदा रखा है, बल्कि बाबा हरभजन बना दिया है। लेकिन, आस्थाएं कहीं अंधविश्वास न बन जाएं इसके लिए संयम की कुछ सीमाएं तय करते हुए सेना मुख्यालय ने बीते कुछ समय से उनकी सालाना छुंट्टी खत्म कर दी है।
बाबा हरभजन को हर साल 14 सितंबर को छुंट्टी पर घर भेजने के लिए फौज को तीन बर्थ एसी फ‌र्स्ट क्लास में बुक करानी पड़ती थीं। दो जवानों की देखरेख में सभी जरूरी सामान से भरा उनका बक्सा ट्रेन से उनके घर भेजा जाता था। स्थानीय आस्थाओं के कारण नाथुला से इस सामान की विदाई और वापसी धार्मिक यात्रा की तरह होने लगी थी। बढ़ती आस्था के कारण नाथुला स्थित बाबा हरभजन के मंदिर पर चप्पलों का लगातार बढ़ता चढ़ावा सेना के लिए प्रबंधन की मुश्किलें खड़ी कर रहा है। इस मंदिर में सात दिनों तक पानी रखने पर उसमें चिकित्सकीय गुण पैदा होने की मान्यता के कारण पानी की बोतलों का भी अंबार लग रहा है।
एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक बाबा हरभजन के मंदिर में लोगों की उमड़ती भीड़ के कारण अब भंडारे और प्रसाद वितरण जैसी परंपराएं भी बन गई हैं। लिहाजा इसके विस्तार को सीमित करने की जरूरत महसूस होने लगी है। एक सिख फौजी के इस मंदिर में धन के चढ़ावे का प्रबंधन भी सेना के लिए परेशानी का सबब है जिसे सरकारी मद में दिखाना चुनौती है।पंजाब के कूका में जन्मे हरभजन सिंह की भर्ती 1966 में सेना की पंजाब रेजीमेंट में हुई थी। पंजाब रेजीमेंट के इस फौजी की अशरीर मौजूदगी की आस्था के कारण 1987 में वहां एक स्मृति स्थल बनाया गया जो अब बाबा हरभजन मंदिर बन गया है। हरभजन को समय-समय पर प्रमोशन भी मिलते रहे हैं। बाबा हरभजन का भले ही आज हमरे साथ शारीर न हो पर उनकी आत्मा आज भी हम को चेन की नींद सुलाती है पूरी एक बटालियन की जगह अकेले ही शरहद पर पहरा देते है देश की सेवा करने का जज्वा इसी को कहते है बाबा हरभजन जहा कही भी होगे बस यही कहते होगे की ये शारीर और आत्मा भारत देश की रक्षा के लिए है । 

Tuesday, 12 March 2013

यू पी सरकार ने क्यों दिए बीस बीस लाख रुपये ।


उत्तर प्रदेश सरकार ने शहीदों और कानून-व्यवस्था बिगड़ने वालो में कोई फर्क नज़र नहीं आ रहा है। डीएसपी जियाउल हक की पत्नी को जो सरकार ने मुआबजा दिया नोकरी का वादा किया वह सब सही है, पर प्रधान और उसके भाई के परिवार वालो को जो मुआबजा दिया गया है उसका अर्थ समझ में नही आ रहा है, सरकार ने जो पेस दिया वह किस का रूपया था जनता का उसको इस तरह किसी को भी दे देना क्या उचित है प्रधान और उसका भाई दुकानों पर कब्जे को लेकर चली आरही रंजिश के शिकार हुए थे न हीं किसी युद्ध के मैदान में । सोलाह दिसम्बर की घटना के बाद ये कहा की जिस के साथ बलात्कार जेसी घटना होती है उत्तर प्रदेश सरकार उसको नोकरी देगी , अब सरकार को ये भी घोषणा करनी चाहिए की एक दुसरे को मरो मरने वाले को परिवार को बीस बीस लाख रुपये मिलेगे और ज्यदा बेहतर ये होगा की मारें वाले के परिवार को कुछ न सही पञ्च लाख तो मिलने चाहिए क्यों की उस के परिवार का व्यक्ति भी तो जेल जाये ग तो उस के परिवार का लालन पालन कोण करेगा । नन्हे प्रधान और सुरेन्द्र के परिवार वालो को क्या इस लिए ये रूपया दिया गया की वह समाजवादी पार्टी के कार्यकर्त्ता थे या रजा भईया के खास थे । जिस प्रकार सरकार दिखावे के लिए राज्य सरकार जनता के पेसे को बर्वाद कर रही है इस पर सरकार से किसी  मिडिया वाले ने नहीं पूछा की क्यों दिया गया प्रधान के परिवार बालो को ये पैसा । सरकार अपने वोट बैंक को बदने के लिए सरकार खजाने को दिखावे के लिए खली करती जा रही है चाहे वह लेपटोप बाँटना हो , बेरोजगारी भत्ता बतना हो , कन्याओ को तीस हज़ार के चेक बटने हो जहा जहा यह कार्यकर्म का आयोजन किया गया उस के लिए पेस कहा से आया वह भी जनता का था केवल और केवल दिखावा करने के लिए सरकार ने करोडो रूपए पानी में वह दिए और अगर विकास की बात करे तो सरकार कहती है की केंद्र सरकार उत्तर प्रदेश को पैसा नहीं देती है ।     



Tuesday, 5 March 2013

उत्तर भारतीयों से सवाल

एक बार फिर से उत्तर भारतीयों पर राज ठाकरे की पार्टी एमएनएस के कार्यकर्ताओं ने सतारा में सैनिक स्कूल में दाखिले के लिए आए बच्चों और उनके पैरंट्स के साथ मारपीट की है।
इस शर्मशार हरकत के बाद में उन उत्तर भारतीयों से ये सवाल पूछता हु जो लोग उत्तर भारत में शिव सेना और एमएनएस पार्टी का झंडा ऊचा करते है।
क्या उन्हें ये हरकत देखकर शर्म नहीं आती की उनके भाइयो और बच्चो के साथ ये लोग के सुलूग करते है महाराष्ट्र में क्या बस राजनीति की रोटिया सीखनी है इन लोगो को
ये देश हम सब का है भारत देश में रहने वाला हर कोई सब से पहले भारतीय है बाद में किसी राज्य का है तो राज ठाकरे जेसे लोग ये देश को क्यों तोड़ने पर लगे है
दूसरी बात ये की क्या डर है कानून को जो इन पर शिकंजा नहीं कसती है और क्यों उत्तर भारत के लोग इन का साथ देते है क्या इन को ये लगता है की हम इन के साथ है तो ये लोग हमें कुछ नहीं कहेगे इन सब को तब पता चलेगा जब किसी दिन ये लोग महाराष्ट्र में पिटते नज़र आयेगे । इन सब से क्या सिद्ध करना चाहते है ये सब 
 

Saturday, 19 January 2013

क्या राहुल गाँधी पार लगा पायेगे कांग्रेस की नैया ?

2014 लोकसभा चुनाव इन चुनावो को लेकर सभी राजनीती पार्टियां आज कल मंथन में लगी है , भाजपा में मंथन होरहा है की उसके पास मुद्दे तो बहुत है चुनाव में प्रचार के लिए पर  वह किस के नाम का सहारा लेकर चुनाव लड़े नरेन्द्र मोदी ,सुषमा स्वराज ,शिवराज सिंह चौहान ,या अरुण जेटली पता नहीं लोकसभा चुनाव आते आते भाजपा तय कर पाती है या नहीं कोन होगा प्रधानमंत्री का प्रवल दावेदार । ये तो थी भाजपा की बात पर कांग्रेस का क्या जो दो दिन से जयपुर में बैठ कर चिंतन कर रही है आने वाले चुनाव किन मुद्दों को लेकर लड़ा जाये क्यों की न तो ये महगाई कम कर पाई , भ्रष्ट्राचार से देश उबक चूका है , देश के सामने इस वक्त कई राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां है इन सब विषयों को लेकर कांग्रेस में मंथन चल रहा है वही सब से बड़ी बात ये की कांग्रेस के युवराज के कंधो पर पार्टी अतरिक्त भार पड़ने वाला है क्यों की पार्टी के अन्दर के लोग मानते है की ये ही कोई चमत्कार कर सकते है और केवल और केवल यही वह शख्स है जो कुछ नया कर सकता है पार्टी के अन्दर और इस शिवर में पार्टी अध्यक्ष बनाने का ऐलान भी हो सकता है। इस नन्ही से जान पर पूरी कांग्रेस का भार पड़ने वाला है कहते है की करे कोई और भरे कोई पिछले नो सालो में काग्रेस ने कोई ऐसा कम नहीं किया जिस को लेकर पार्टी के नेता जनता के सामने आये इस लिए सरकार और कांग्रेस के पास राहुल गाँधी के आलावा कोई विकल्प नहीं है क्या सरकार राहुल गाँधी की अगुवाई में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां को बचे एक साल में किसी चमत्कार से कम या ख़त्म कर पायेगे या नहीं । 

Saturday, 29 December 2012

माँ में जीना चाहती हु : दामनी


दिल्ली गेंग रेप पीड़ित दामनी भले है हमेशा के लिए सो गयी हो पर उस ने आज पुरे देश को जगा दिया है,जीवन और मोत के लिए लड़ रही दामनी मोत से आखरी वक़्त तक लड़ती रही पर मोत के आगे उसकी एक न चली आखरी समय तक अपनी माँ से यही कहती रही की माँ में जीना चाहती हु । दामनी की आखें भले ही हमेश के लिए बंद हो गई पर देश के लोगो को सिखा गयी की किस तरह से अपने हक़ के लिए लड़ा जाता है ,ऐसा  आज़ादी के 65 साल बाद एस पहली बार हुआ है कि इस देश की जनता किसी को इंसाफ दिलाने के लिये,पूरा देश एक साथ खड़ा हुआ हो ,संसद से लेकर सड़क तक बस यही माग की इन बलात्कारियों को फासी की सजा हो और महिलाओ की सुरक्षा व्यवस्था के लिए नया कानून बनाया जाये जिस से आने वाले वक़्त में दामनी की तरह कोई और लड़की बलात्कार की शिकार न बने और इस हेवानियत को अंजाम देने से पहले दस बार अपराधी सोचे की उसका हश्र क्या होगा आज देश के हर व्यक्ति के अन्दर गुस्सा है चाहे वह बूढ़ा ,बच्चा महिला या पुरुष हो हर कोई अपनी सुरक्षा की मांग कर रहा ही महिला अपनी तो पुरुष अपनी माँ, बेटियों और बहनों की कही उस के परिवार और देश में दामनी जेसा दर्द किसी और को सहना पड़े । लेकिन हर समस्या का हल कानून ही नहीं हम को भी आगे आना होगा , अगर दस पुरषों में एक महिला अकेली है और भले ही उस को एक से ख़तरा हो तो बाकी नौ लोगो को उस की रक्षा करनी होगी हमे लड़ना होगा हर उस महिला के लिए जो किसी की माँ-बेटी या बहन है,हमे बताना होगा समाज को की बेटिया ही किसी के घर की शोभा बनती है ये बेटिया ही हमारी माँ -बहिन और बीबी बनती है ये ही है जो सच में हमारे बंश को आगे ले जाती है हमे अपनी  कोख़ से जन्म देती है लेकिनक्या हम ये सब कर पाएगे या दामनी की यादो के साथ धीरे धीरे सब खत्म हो जायेगा नहीं अब ऐसा  नहीं होगा क्यों अब भारत जाग रहा है अब लोग जाग रहे है जमाना जाग रहा है और दामनी का ये बलिदान खली नहीं जायेगा ।         


Sunday, 25 November 2012

कसाब की तुलना शहीद भगत सिंह से क्यों ?


बाबा रामदेव कसाब की फासी पर ऊँगली उठानी शुरू कर दी है , और केंद्र सरकार के ऊपर इलज़ाम लगाया है की उस ने कसाब को फासी देकर हीरो बना दिया है । कसाब को फासी देकर सरकार ने आतंकियों के सामने घुटने टेक दिए है । 
बाबा रामदेव ने अब तक सरकार को काले धन को लेकर घेरा है और इस बात से हर हिन्दुस्तानी का पता चला की हमारा कितना धन विदेशो में जमा है अगर वह वापस आजाये तो भारत की अर्थ व्यवस्था और सही हो जायगी । लेकिन आज के इस बयां से बाबा रामदेव क्या कहना चाहते है । भगत सिंह की फासी और कसब को दी गयी फासी से तुलना कर दी । कसाब एक आतंकवादी था जिस के हट मासूमो के खून से रंगे थे और भगत सिंह एक सच्चा देश भक्त जिस ने अपने प्राणों को इस देश की आजादी के लिए नोछावर कर दिए । कस्साब की फासी तय तारीख पर हुई ,हो सकता था सरकार अगर इस को सब के सामने बताती की फासी कब कहा और किस समय दे जायेगी तो हो सकता है वह हीरो बन जाता क्यों की लोग फासी के समय जेल के आस पस्स जरुर जाती मीडिया भी इस से पीछे नहीं रहती वह भी वहा पहुच जाती और वह बन जाता रातो रत हीरो जिस  फासी हुई उस  के   भी न्यूज़ चेनल पर कसाब को लेकर ज्यदा न्यूज़ नहीं देखने को मिली पर हम तुम इस मामले को तूल देकर जरुर कसाब को हीरो बना रहे है । सरदार भगत सिंह को अंग्रेजो ने धोके से मारा उस को एक दिन पहले फासी दे दी गयी उस की लाश को भी उस के परिवार वालो के हवाले नहीं किया और जल्दी जल्दी में उसका शव को नदी में बहा दिया ।
सरकार ने कसाब को तेय समय पर फासी दी सव को पाकिस्तान में लेने की भी बात कही पर उन्होंने शव लेने से मन कर दिया । कोई व्यक्ति देश का हो बहार का हो भले ही वह आतंकवादी है क्या हमारा ज़मीर हमारा देश या संस्क्रति इस बाद के लिए कहती है की किसी के शव को उसके धर्म के मुताबिक उसका अंतिम संस्कार नहीं करना चाहिये । कसाब को फासी देकर सरकार ने अपने घुटने नहीं टेके है बल्कि सबक दिया है उन आतंकियों को की इस देश आतंक वाद फेलोगे तो इसी तरह फाशी पर लटका दिए जाओगे । में तो घोर निंदा कर ता हु एक देश भगत की फासी और एक आतंकवादी की फासी को एक समान बताने वाले बाबा राम देव की । 


    

Saturday, 24 November 2012

उत्तर प्रदेश के किसानो पर पड़ेगी बढ़ते ब्याज की मार।


उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार बने हुए आठ महीने का समय हो गया है चुनाव के समय अपने घोषणा पत्र में जो किसानो के लिए 50000 हज़ार कर्ज माफ़ी की घोषणा की गयी थी ,मार्च के बाद से ही किसानो ने अपने कर्ज की किश्तों का भुकतान नहीं किया क्यों की सब को यही उम्मीद थी की 50000 हज़ार रूपए तक का क़र्ज़ सभी किसानो का माफ़ हो जायेगा ,लेकिन क़र्ज़ माफ़ी के चक्कर में किसानो को बडते ब्याज की मार झेलनी पड़ेगी । 
अगर किसान मार्च में अपना क़र्ज़ चुकाते तो :- 3% का ब्याज 
अब भुगतान करना :- 12.70 % ब्याज दर से जिस में 2% का पेनल्टी शुल्क शामिल है 
और अगर इस कर्ज जी वसूली तहसील दुआरा या अमीन करते है तो 10% कनेक्शन शुल्क और देना पड़ेगा।
यानि की अगर किसान ने अपना कर्ज नहीं दिया तो उसको मूलधन पर कुल 22.70% का ब्याज देना पड़ेगा   
और कर्ज भी उसी व्यक्ति का माफ़ होगा जिस व्यक्ति ने अपने मूलधन का 10% जमा किया है या उस किसान की भूमि बेंक के पास राखी हो उसी किसान का कर्ज माफ़ होगा और किसी का नहीं । प्रदेश सरकार ने भ्रमित कर के किसानो का वोट बेंक तो हासिल कर लिया मगर अब छोड़ दिया ब्याज के  मरने के लिए ।
किसान इसी आस में रहे की हर किसी किसान का कर्ज माफ़ होगा मुलायम सिंह के जन्म दिन पर जो सोगात किसानो को दी गयी उस से कुछ ही किसानो के चेहरे खिले है बाकि किसानो को मायूसी हाथ लगी है और सर पर चढ़ गया है ढेर सारा ब्याज 50000 हजार का कर्ज चुकाने में तो किसानो को अपना खून पसीना एक करना पड़ गया , लेकिन जो कर्ज पर आज ब्याज चडा है उस को चुकाने में तो किसानो को अपनी जान गवानी पड़ जायेगी । देश प्रदेश में किसानो दुआर जो आत्महत्या की जा रही है क्या वह पहले से कम है जो सरकार उन्हें कर्ज माफ़ी का लालच देकर किसानो के सर पर बड़ते हुए ब्याज का भार डाल कर और कर्ज के दल दल में धकेल दिया


Wednesday, 21 November 2012

क्या होगा संसद शीतकालीन सत्र का ?

संसद शीतकालीन सत्र आज से शुरू भारी हंगामे की आशंका 
आज से शुरू होने वाला संसद का शीतकालीन सत्र क्या चल पायेगा ?
ऐसे न जाने कितने सवाल इस देश के हर व्यक्ति के मन में चल रहे होगे कही पिछली बार की तरह
हंगामे की भेट चढ़ जायेगा इस बार भी ये सत्र संसद वह जगह है जहा देश के हर क्षेत्र से हमरे संसद कुछ सवाल लेकर आयेगे और सरकार से उसका जवाब मागेगे पर क्या ये हो पायेगा या हम होगे शर्मशार क्यों की यहाँ हो सकता है हंगामा बन सकता है यहाँ अखाड़ा ।क्यों की लोगो की नहीं है मंशा पहले इन को चाहिए अपने सवालो के जवाब :-
एफ डी आई के मुद्दे को लेकर टकराव साफ दिखाई दे रहा है ।
सरकार के खिलाफ आविश्वास प्रस्ताव ला सकती है तर्मुल कांग्रेस ।
बीजेपी का कहना है की एफ .डी . आई मुद्दे पर वोटिंग होनी चाहिए ।
बसपा प्रमोशन में आरक्षण को लेकर सवाल उठयेगी ।
आविश्वास प्रस्ताव से रहेगी दूर ।
सपा ने कोई भी पते नहीं खोले है
184 के तेहत चर्चा हो मत विभाजन वोटिंग की मांग ।
वोटिंग के पक्ष में नहीं है सरकार ।
25 विधयेक पास होने है 16 दिन में क्या एसा हो पायेगा ?
क्या लोकपाल बिल होगा पास लोकायुक्त होगा और मजबूत ।
विपक्ष सत्र के दोरान दुसरे मुद्दों को लेकर सरकार को क्यों नहीं घेरती है।
यही मोका होता है जब सरकार से सरे मुद्दों पर सरकार से सवाल किये जाये और जवाब
मांगा जाये एक ही मुद्दे को लेकर सरकार को घेरना सरकार को गिरना क्या यही है । विपक्ष का काम
महगाई आज का सब से बड़ा मुद्दा है, विकास ,देश में हो रहे घोटाले भ्रष्टाचार भी बहुत बड़ा मुद्दा क्या कर रही है। इन सब को रोकने के लिए सरकार क्या कर रही है ? इन सब से परे हट ती हुई दिखाई दे रही है विपक्ष का कहना है की महगाई भ्रष्टाचार जेसे मुड़े पर पहले भी कई बार बहस हो चुकी है एफ डी आई नया मुद्दा है ।
क्या ये सही है आप लोगो की राय चाहिए ?   

Tuesday, 20 November 2012

कसाब को फासी अफजल गुरु को कब



आज सुबह का दिन मुंबई हमले में मरे गये निर्दोष लोगो को श्रधांजलि दिन के रूप में जाना जायेगा क्यों की आज सुबह 7.30 बजे मुंबई हमले का दोषी अजमल कसाब को फासी दे दी गयी। 2008 में मुंबई हमले का दोषी कसब 26 नवम्बर को गिरफ्तार किया गया था। कसाब ने फासी माफ़ी के लिये राष्ट्रपति के यहाँ अपनी याचिका भेजी थी उस याचिका के ख़ारिज होने के बाद से ही ये अनुमान लगाया जा रहा था की अब कसब को फासी निश्चित है और आखिर आज 21/11/2012 को कसब को फासी दे दी गयी। जिस तरह से सरकार ने अजमल कसब की फासी में देरी नहीं लगायी तो संसद हमले के दोषी अफजल गुरु के मामले में देरी क्यों कर रही है अफजल गुरु 13/12/2001 को संसद हमले का मुख्य आरोपी है ये हमला हमारे लोकतंत्र पर हमला था कोर्ट ने फासी की सजा सुनाये जाने के बाद दया याचिका राष्ट्रपति के यहाँ विचाराधीन है । जीतनी जल्दी कसाब की फासी में दिखाई उतनी ही देरी अफजल गुरु की फासी में की जा रही है । अफजल गुरु की फासी की सजा को उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय ने बरकरार रखा कांग्रेस सरकार मोहम्मद अफजल गुरु की फासी के मामले में कुछ भी कहने में कतरा रही है और मामले को राष्ट्रपति के पास दया याचिका होने का हवाला देती है।

    

Sunday, 18 November 2012

मुंबई का शेर कोन बाला साहब ठाकरे

बालीबुड की एक फिल्म 'सत्य' जिस में मनोज बाजपेयी का एक डायलाग था की मुंबई का किंग कोन 'भीकू महत्रे' लेकिन असल में मुंबई का किंग भीकू महत्रे  शिव सेना प्रमुख बाला साहब ठाकरे थे । शिव सेना पार्टी का जो झंडा है उस पर भी शेर का चिन्ह है या उस झंडे पर बाला साहब ठाकरे का फोटो इसी लिए बाला साहब ठाकरे को महाराष्ट्र का शेर के नाम से जाना जाता था और आगे भी जाना जायेगा इस इस शेर की जगह कोई भी नहीं ले सकता । बाला साहब ठाकरे को आज अंतिम विदाई देने के लिए सारा मुंबई शहर का जन सेलाव शिवाजी पार्क की तरफ चल दिया है । कहते है जब शेर बुढा हो जाता है तो वह अपनी मदान में चुप जाता है लेकिन बाला साहब ठाकरे इसे शेर थे जो आखरी समय में भी अपने विरोधियो पर गरजे उन्होंने आखरी समय में कहा था की मेरा शरीर साथ नहीं दे रहा है मगर मेरा मन आज भी आप के लिए कुछ करने का मन करता है उन्होंने जाते जाते अपने सेनिको से कहा की अब तक मेने आप को और शिव सेना को चलाया अब आप लोग चलाये । बाल ठाकरे की सब से बड़ी खासियत ये थी की जो उन्होंने जो एक बार कह दिया वह कर के दिखाया और उस बात से कभी भी पीछे नहीं हटे । बाला साहब ठाकरे की पहचान किसी राजनीती व्यक्ति की नहीं रही उन्होंने हमेशा लोगो के बीच में रहकर लोगो को जोड़ने का कम करते थे उन्होंने हमेश लोगो को हक़ की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित किया । बाला साहब एक ऐसे शख्स थे जो आम आदमी थे अगर ये एक आम आदमी हमेश शेर की तरह जिया जिस की एक आवाज़ पर पूरा महाराष्ट्र सडको पर निकल आया करता था । जब पहली बार बाला साहब ठाकरे को गिरफ्तार किया गया तो सारा मुंबई सडको पर था । लेकिन आज वह हमारे बीच नहीं रहे आज उनके पार्थिव शारीर को अंतिम विदाई दी जा रही है ।       



Saturday, 17 November 2012

पोंटि चड्ढा की मोत का कारण उस का सम्राज

मुरादाबाद के निवासी और उत्तर प्रदेश के सब से बड़े शराब माफिया पोंटि चड्ढा की हत्या उन्ही के भाई हरदीप चड्ढा दुरा कर दी गयी इस ख़बर से पुरे चड्ढा गुरुप और मुरादाबाद शहर में शोक की लहर है । मुरादाबाद के लाजपत नगर के छोटे से घर में रहने वाले पोंटि चड्ढा आज पुरे 50 हज़ार करोड़ की सम्पति के मालिक थे इसी सम्पति को लेकर इन दोनों भाइयो में झगडा चल रहा था और दोनों की मोत का कारण भी यही यही संम्पति बनी । 6 हज़ार का शराब का कारोबार हजारो करोड़ो की प्रोपर्टी का कारोबार था पोंटि चड्ढा का 4000 शराब की दुकाने थी , शुगर मिले पेपर मिले शोपिंग मॉल ,फिल्म बनाने तथा फिल्म बेचने का कारोबार था , राजनीती में भी अपनी अच्छी पकड़ थाई पोंटि की 2003 से मायावती की सरकार के बाद पोंटि का कारोबार दिन दुगनी रात  चोग्नी तरकी करी । पोंटि की मोत के बात सब से बड़ा सवाल यही खड़ा होता है की इस विशाल प्रोपर्टी का मालिक कोन होगा उत्तर प्रदेश , पंजाब, हिमाचल प्रदेश में अपना लोहा मनवा चूका था पोंटि चड्ढा । लिकिन पोंटि च्द्दाहा ने कभी नहीं सोचा होगा की इतनी बड़ी प्रोपर्टी का मालिक या व्यवसाय का मालिक होने के बाद भी इस तरहा से उस की मोत होगी । पोंटि चड्डा की मोत के तुरंत सभी मॉल को बंद कर दिया गया सभी सनीमा हेलो को भी बाद कर दिया गया सभी लोगो के पेसे को बापस करदिये गए । कुछ भी कहो पोंटि का अपना सम्राज था और उसी पर वह राज करता था और इसी वजह से परिवार में उस सम्राज को लेकर आपस में विवाद उत्पन होना शुरू होगया था और यही पोंटि की मोत का कारण बन गयी ।    

पोंटी चड्ढा और हरदीप चड्ढा की मोत

मुरादाबाद के चड्ढा परिवार और शराब के बहुत बड़े कारोबारी पोंटि चड्ढा के भाई हरदीप चड्ढा की महरोली फार्म हॉउस पर हत्या । पिछले कुछ दिन पहले मुरादाबाद में उनके घर पर भी हुई थी फायरिंग  पोंटि चड्ढा उत्तर प्रदेश के सब से बड़े शराब के कारोबारी है वेब के नाम से मॉल है फिल्मे भी बनाते है ,पिछले कुछ दिन पहले मुरादाबाद में फायरिंग के बाद सामने ये आया था की इन में आपस में सम्पति को लेकर चल रहा था विवाद पोंटि चड्ढा के भाई की मोट का शायद यही कारण मन जा रहा है जी में दो गार्ड घायल हुए है दोनों फोर्टीज अस्पताल में भर्ती ।  


Monday, 5 November 2012

रामपुर सीआरपीएफ हमलावारो को माफ़ी की तयारी

आज कल उत्तर प्रदेश सरकार जिस तरह से आपराधिक मुक़दमे वापस ले रही है उस को देख कर यही लगता है की उत्तर प्रदेश में कोई भी व्यक्ति अपराधी नहीं है जो भी अपराधिक घटनाएं यहाँ होते है या अपराध होता है उस में किसी व्यक्ति विशेष का हाथ नहीं होता है बस हवा में ये सब हो जाती है और बेचारे लोगो को झूठा फसा दिया जाता है । उत्तर प्रदेश सरकार ये कहती है की पिछली सरकार ने केवल बदले की भावना से इन लोगो को फसाया और इन पर मुकदमो को लड़ा गया है जबकि आज के हाई कोर्ट के फेसले के मुताबिक मायावती को और उनकी सरकार के मत्रियो को फसाया गया है उस पर कोर्ट ने आदेश दिया है। मिश्रा ने कहा कि जो भी पीआईएल दायर हुई थीं वह राजनीतिक द्वेश से दायर की गई थीं। मुरादाबाद में डी आई जी  पर जो हमला हुआ था उस में जितने भी लोगो को अभियुक्त बनाया गया था उन पर से मुकदमो को हटा दिया गया है भट्टा परसोल में जो घटना घटी थी उस मामले से सम्बंधित सभी मुक़दमे बापस ले लिए गए है अमर सिंह ,संजय दत्त ,अमिताभ बच्चन के ऊपर से भी सभी मुकदमो हटा दिया गया है । पर इन से हट कर एक मुकदमा है जिस में देश की रक्षा करने वाले देश के वीर जवान वह भी 7 जवान शहीद हो गये थे उन आतंकियों से भी मुक़दमे बापसी की तयारी है ये मामला कुछ हज़म नहीं हो रहा है क्या देश से बड कर इन नेताओ की कुर्सी हो गयी है क्या ? जहा 2007 में सारा देश नये साल की खुशिया मन रहा था, लोग नए साल के जश्न में डूबे हुए थे वाही ये आतंकी  सीआरपीएफ रामपुर में हमले की तयारी कर मामले को अंजाम दिया इस हमले में 7 जवान और एक रिक्शे वाले को अपने प्राण गवाने पड़े। इस हमले के 40 दिन बाद आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिसमें दो पाकिस्तानी थे, तब से मामला कोर्ट में है। अब करीब पांच साल बाद शासन ने प्रशासन को एक गोपनीय पत्र जारी करते हुए इस केस को वापस लेने के संबंध में रिपोर्ट तलब की है। प्रशासन ने इस मामले की पैरवी में जुटे शासकीय अधिवक्ताओं से राय मांगी है। शासकीय अधिवक्ताओं के पैनल ने केस वापस लेने की कवायद पर अपनी आपत्ति दर्ज करा दी है। अधिवक्ताओं केपैनल ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है इस केस को वापस लेने से सुरक्षा तंत्र को खतरा पहुंचेगा, क्योंकि इसके पीछे लश्कर-ए-तोएबा जैसे खतरनाक संगठन का हाथ था। वहीं इस मामले में आला अधिकारियों ने चुप्पी साध रखी है। इन सब के पीछे उत्तर प्रदेश सरकार की क्या मनसा है ये बता पाना मुश्किल है पर जहा सरकार प्रदेश को अपराध मुक्त बनाने की बात कर रही है क्या इस तरह से अपराधियों से मुक़दमे वापस लेकर उन को फिर से प्रदेश में अपराध करने के लिए झोड़ रही है अगर सरकार से पुचा जाये की इन हमलो में जो शहीद हुए है कभी उन के घर जा कर उन का हल चल लिया या उन के परवर की आर्थिक मदत के लिए सरकार ने क्या करा तो इस का जवाब हमे एक छुपी के रूप में मिलेगा क्या इन शहीदों की शहादत का तोफा इन आतंकियों को मुक्त करना है|   
 

Sunday, 4 November 2012

सपा दे सकती है लालबत्ती का लालच



मुरादाबाद :- मुरादाबाद की कांठ  विधानसभा से पीस पार्टी के विधायक  अनीस उर रहमान ने कहा है की अभी किसी भी विधायक ने इस्तीफा नहीं दिया है और वह सब पीस पार्टी में ही है। हां 10 नवम्बर को पीस पार्टी के नाराज़ विधायक को होने वाली मीटिंग तय करेगी की क्या करना है । क्यों की पीस पार्टी 2012 के विधान सभा चुनाव में एक पार्टी के रूप में आई और 4 सीटो जितने में भी कामयाब भी रही तभी से ये अटकले लगायी जा रही थी की पीस पार्टी लोकसभा चुनाव में भी कही एसा चमत्कार न कर दिखाए क्यों की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर अय्यूब अंसारी ने अपनी इस पार्टी के माध्यम से मुस्लिम मतदाताओ को रिझाने में कामयाब रही उधर मुस्लिम वोट बैंक जो की सपा का वोट बैंक माना जाता है उस पर पीस पार्टी कही सेंध न मर दे , और लोक सभा चुनाव को नजदीक देखते हुए सपा ये नया पत्र फेक रही है जिस से पीस पार्टी में दरार उत्पन हो और अस्तित्व में आने से पहले ही पीस पार्टी का खात्मा हो जाये इन विधायको तोड़ने के लिए सपा सरकार इन विधायको को लालबत्ती का लालच भी दे सकती है लालबत्ती के लालच में अगर विधायक टूटते है तो पीस पार्टी के लिए मुश्किल कड़ी हो जायेगी और आने वाले लोक सभा चुनाव में राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉक्टर अय्यूब अंसारी केसे यकीं दिलाये गे की उनकी पार्टी से जो जीतेगा वह बाद में भाग कर किसी दूसरी पार्टी में नहीं जायेगा । अब साडी बाते 10 नवंबर की ही मीटिंग तय करेगी की ये तीनो विद्गायक किस के साथ जाते है सपा के या पीस पार्टी में ही रह कर पानी पार्टी को मजबूती देगे ।विधायको का टूटना दूसरी पार्टी में जाना ये कोई उत्तर परदेश की राजनीती में पहली बार नहीं हो रहा है इस से पहले मायावती की 2004 की सरकार इसी वजाहा से गिर गयी थी 30 से भी जयादा मंत्री बसपा का साथ छोड़ कर सपा में चले गए थे । अब तो ये देखना है की पीस  पार्टी की मुश्किलें बडती है या कम होती है ।      

Saturday, 3 November 2012

सपा सरकार के नम्बर कटे :-बेनी प्रसाद वर्मा


आज इस्पात मंत्री ने सपा सरकार पर एक तरफ़ा राजनीती की बात कही उन्होंने कहा है की देश में हर तबके का व्यक्ति रहता है तो केवल एक ही समुदाय को फायदा क्यों पहुचाया जा रहा है, साथ ही में भाजपा को भी बीच में लपेटते हुए दोनों के लिए वोट बैंक की राजनीती कर ने वाले बताया उन्होंने कहा है की मुख्य मंत्री अखिलेश यादव की सरकार केवल मुसलमानों का वोट हासिल करने के लिए अकेले मुसलमानों को फायदा पहुचा रही है मुस्लिमो की बेटियों के लिए 30-30 हज़ार रूपए बाटे जा रहे है उत्तर प्रदेश की सरकार को केवल मुस्लिम ही नज़र आरहे है दलित और पिछड़े नहीं सामान्य जाती के लोग भी गरीबी रेखा के नीचे रहते है अगर लाभ देना है ही तो गरीबो को दिया जाये केवल एक समुदाय को नहीं । बेनी प्रसाद ने उत्तर प्रदेश में होने वाले दंगों पर भी चिंता जताई और सीधे तोर पर सरकार को जिम्मेदार बताया । उन्होंने सीधे-सीधे कहा है की ये सरकार मुस्लिमो के वोट का सोदा कर रही है ये सब लाभ देकर । एक तरफ जहा उत्तर प्रदेश सरकार को बेनी प्रसाद वर्मा पुरे में से पुरे नम्बर दे रहे थे वही आज सरकार और सरकार के मंत्रियो पर ख़राब राजनीती का आरोप लगाया उत्तर प्रदेश में जब से सपा की सरकार बनी है तब से साम्प्रदायिक दंगे भी बड़े है। आज के बयां से तो साफ लगता है की नम्बर उन्होंने दिए थे आज वह उन नम्बरों में कटोती करते नज़र आरहे है ।
    


क्या होगा पीस पार्टी का ?

उत्तर प्रदेश की राजनीती में दिन बड़ा हल चल वाला रहा यू .पी की राजनीती ने पीस पार्टी ने अभी अपने कदम जमाये नहीं की उखड़ने पहले शुरू हो गए जहा आज तीन विधायक पिस पार्टी से अलग हो गए वाही ये तीनो विधायक समाज वादी पार्टी में शामिल होगये है इन में से अखिलेश पिस पार्टी से रायबरेली से विधायक है । क्या होगा इन छोटी पार्टियों का ? जो शुरू होने से पहले है खात्मे की और अगर्सर हो जाती है लोक सभा चुनावो को देखते हुए से सपा के लिए प्लस पॉइंट है की तीन विधायक और शामिल हो गए है उनकी पार्टी में देखना ये है की लोक सभा चुनाव में सपा को कितना फायदा होता है लेकिन अभी तक पीस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष याकूब अली का किसी तरह का बयां नहीं आया है इस मामले को लेकर राजनीती के गलियरो में ये तो नहीं हो रहा है की पीस पार्टी का सपा में विलय हो रहा हो लेकिन अभी कुछ नहीं कहा जा सकता सपा और पीस पार्टी की तरफ से इन बातो को लेकर कोई बयां नहीं आया है।